
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक बुधवार को खत्म हो गई। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी लोन की ईएमआई पर और राहत नहीं मिलेगी। RBI ने रेपो रेट को 4% ही रखा है।
गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक के बाद आरबीआई के फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, कोरोना के बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। लेकिन जिस तरह से मामले बढ़ रहे हैं, उससे थोड़ी अनिश्चिचतता बढ़ी है। लेकिन हम चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं।
गवर्नर शक्तिकांत दास के बयान की बड़ी बातें
- 'RBI रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा, यह 4% ही रहेगा। रिवर्स रेपो रेट 3.35% है।'
- '2021-22 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 10.5% पर बरकरार है।'
- 'सभी भारतीय वित्तीय संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपए का कर्ज दिया जाएगा।'
- 'आरबीआई पर्याप्त नकदी के साथ बाजार का समर्थन करेगा।'
- 31 मार्च 2021 को, सरकार ने अगले पांच सालों (अप्रैल 2021 से मार्च 2026) के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य को 4% पर बनाए रखा। इसमें निचला स्तर 2% और उच्चतम स्तर 6% है।
पिछले साल मई से नहीं हुआ बदलाव ?
रिजर्व बैंक का रेपो रेट 4 फीसदी है, वहीं रिवर्स रेपो रेट 3.5 फीसदी है। पिछले साल मई से ही रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों को समान रखा है। 22 मई, 2020 को रिजर्व बैंक ने पॉलिसी रेट में बदलाव किया था। तब रेपो रेट में कटौती कर उसे 4 फीसदी कर दिया गया था। यह इसका सबसे निचला स्तर है। फिलहाल, रिजर्व बैंक का मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट 4.25 फीसदी और बैंक रेट भी 4.25 फीसदी पर है।
क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट
बैंकों को दिए गए लोन पर रिजर्व बैंक जिस दर से ब्याज वसूलता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। वहीं, बैंकों की ओर से जमा की गई राशि पर रिजर्व बैंक जो ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है।
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