
आईपीएल में 18 साल बाद ट्रॉफी जीतकर RCB ने इतिहास रचा था। जीत का सरकारी जश्न एक हादसे में बदल गया। लाखों फैन्स की भीड़ में भगदड़ मच गई, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 56 से ज़्यादा घायल हो गए। सरकार की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवारों का दुःख देखकर दिल दहल जाता है। बेंगलुरु पुलिस ने रविवार को RCB की विजय परेड कराने की सलाह दी थी, लेकिन कर्नाटक सरकार ने IPL जीत के अगले ही दिन परेड कराने की ज़िद की। रविवार को छुट्टी होने के कारण ट्रैफिक कम रहता और सुरक्षा इंतज़ाम अच्छे से हो पाते, ऐसा पुलिस का कहना था।
इस बीच, सरकार के रवैये पर लोगों में गुस्सा है। 11 मौतों के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है। ऐसे मामलों में 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज होनी चाहिए और कोर्ट में पेश होनी चाहिए। मामले की हर जानकारी कोर्ट को देनी होती है। ये कानून है।
लेकिन इतने घंटे बाद भी एक भी FIR दर्ज नहीं हुई! इसके बजाय, UDR यानी Unnatural Death Reports दर्ज किए गए हैं। UDR में कोई क्रिमिनल जाँच नहीं होती और तहसीलदार मामले की निगरानी करते हैं। इस बीच, हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
आज कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सरकार की तरफ से पेश हुए एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी से कई सवाल पूछे गए। क्या इतनी बड़ी भीड़ के लिए सही इंतज़ाम थे? क्या मेडिकल टीम मौजूद थी? क्या एम्बुलेंस थी? कोर्ट ने सरकार से सारी जानकारी मांगी है और सुनवाई आगे बढ़ा दी है।
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