राजनाथ सिंह कल करेंगे रेजांग ला युद्ध स्मारक का उद्घाटन, 1962 के युद्ध के वीरों को मिलेगा सम्मान

Published : Nov 17, 2021, 09:22 PM ISTUpdated : Nov 17, 2021, 09:32 PM IST
राजनाथ सिंह कल करेंगे रेजांग ला युद्ध स्मारक का उद्घाटन, 1962 के युद्ध के वीरों को मिलेगा सम्मान

सार

1962 की लड़ाई और गलवान घाटी में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को सम्मान देने के लिए रेजांग ला युद्ध स्मारक (Rezang La war memorial) बनाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह युद्ध स्मारक का उद्घाटन करेंगे।

नई दिल्ली।  भारत और चीन के बीच सीमा पर तनातनी जारी है। इस बीच चीन को प्रबल संदेश देने के  लिए भारत ने लेह में स्थित रेजांग ला युद्ध स्मारक (Rezang La war memorial) का विस्तार किया है। इसे नया रूप दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) गुरुवार को युद्ध स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (Gen Bipin Rawat) भी मौजूद रहेंगे। यह स्मारक 1962 की लड़ाई में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों और गलवान घाटी के शहीदों को सम्मान देने के लिए बनाया गया है।

रेजांग ला में 1962 में हुई लड़ाई की तस्वीर। 

 

18 हजार फीट की ऊंचाई पर रेजांग ला में 1962 में हुए जंग में चीन के 1310 सौनिकों की जान गई थी। 13 कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों से उनका सामना हुआ था। भारत के 120 में से 114 जवान इस लड़ाई में शहीद हुए थे। लड़ाई शुन्य से कम तापमान में लड़ी गई थी। अदम्य साहस और वीरता के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 

अपने घायल साथी को ले जाते चीनी सैनिक।

 

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार पहले का स्मारक छोटा था। इसका निर्माण 1963 में किया गया था। अब स्मारक का विस्तार किया गया है। स्मारक में मेजर शैतान सिंह सभागार और रेजांग ला फोटो गैलरी है। इसके साथ ही गलवान घाटी में शहीद हुए 20 जवानों के नाम भी लिखे गए हैं। अब यह लद्दाख के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।  सूत्रों के अनुसार अगले सीजन से चुशुल, रेजांग ला, डेमचोक और अग्रिम इलाकों के अन्य हिस्सों के गेट पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे।

1962 की जंग में इस्तेमाल हुए हथियार।

 

स्मारक चुशुल सेक्टर में स्थित है। यह कैलाश रेंज के करीब है जहां भारतीय सैनिकों ने एहतियाती उपाय कर चीनी सैनिकों को चौंका दिया था। इस कदम ने भारतीय सेना को पैंगोंग त्सो क्षेत्रों और टकराव वाले अन्य क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी के लिए बातचीत में मदद की थी।

 

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