
राेहतक। हरियाणा के रोहतक और बहादुरगढ़ में दो दिन के भीतर दो युवा बास्केटबॉल खिलाड़ियों की मौत ने राज्य के स्पोर्ट्स सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। दोनों हादसे एक जैसे दोनों में प्रैक्टिस के दौरान बास्केटबॉल का पोल गिरा, और दोनों हादसों ने दो बेहद होनहार टैलेंट्स की जिंदगी खत्म कर दी। इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पहला हादसा CCTV कैमरे में कैद हुआ, जिसमें एक सेकंड में सब कुछ बदलते दिखा।
रोहतक के लखन माजरा कोर्ट में 16 साल के हार्दिक, एक नेशनल-लेवल बास्केटबॉल प्लेयर, हमेशा की तरह प्रैक्टिस कर रहे थे। CCTV फुटेज में दिखता है कि हार्दिक थ्री-पॉइंट लाइन से दौड़ते हैं और बास्केट पर जंप लगाते हैं। पहली बार सब ठीक होता है, लेकिन दूसरी जंप में वह रिम पकड़ते हैं और अचानक ही पूरा पोल आगे की ओर झुककर उनकी छाती पर गिर जाता है। यह पोल इतना भारी था कि हार्दिक उसके नीचे दबकर वहीं गिर पड़ते हैं। उनके दोस्त दौड़कर आते हैं, पोल उठाते हैं, लेकिन तब तक यह हादसा उनकी जिंदगी छीन चुका था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोर्ट का पोल शायद ठीक से फिट नहीं था। सवाल यह उठता है कि अगर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी यहां प्रैक्टिस करते हैं, तो क्या ऐसे उपकरणों की नियमित जांच नहीं होनी चाहिए? क्या इतने कमजोर स्ट्रक्चर खिलाड़ियों के लिए जानलेवा नहीं हो सकते?
रोहतक की घटना के तुरंत बाद बहादुरगढ़ से भी ऐसी ही खबर आई। 15 साल का अमन, जो स्कूल में मेडल जीत चुका था, स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहा था कि तभी बास्केटबॉल का पोल अचानक गिर गया। अमन को गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। परिवार उसे तुरंत अस्पताल ले गया, लेकिन देर रात उसकी भी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में लापरवाही हुई। लोगों के दिलो दिमाग में सवाल कौंध रहा है कि क्या यह संयोग है, या फिर हरियाणा के स्पोर्ट्स कोर्ट किसी बड़ी खामी की ओर इशारा कर रहे हैं?
दो युवा खिलाड़ी, दोनों टैलेंटेड, दोनों का भविष्य उज्ज्वल और दोनों की मौत एक जैसी दुर्घटना में। इन घटनाओं ने स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्फ हादसे नहीं थे, बल्कि ऐसी चेतावनियाँ थीं जिन्हें समय रहते समझा नहीं गया।
हार्दिक और अमन दोनों बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। हार्दिक का नेशनल टीम में चयन हो चुका था। अमन स्कूल में मेडल जीत चुका था। दोनों परिवार सवाल पूछ रहे हैं-
यह समय है जांच, जवाबदेही और सुधार का-इससे पहले कि कोई और टैलेंट इसी तरह खत्म हो जाए।
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