रूस-भारत में 2 बड़े समझौते: मोदी-पुतिन की जॉइंट पीसी में क्या हुआ? पढ़ें 6 खास बातें

Published : Dec 05, 2025, 03:03 PM IST
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सार

भारत-रूस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने कामगारों की आवाजाही, हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन पर दो प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जॉइंट पीसी में दोनों नेताओं ने शांति, वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे में भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने वाले कई अहम कदम उठाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कामगारों की आवाजाही, हेल्थ सेक्टर और मेडिकल एजुकेशन से जुड़े दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह समझौते दोनों देशों के बीच आर्थिक और मानव संसाधन सहयोग को नई ऊंचाई देने वाले साबित हो सकते हैं। आइए जानतें हैं इस ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस की 6 प्रमुख बातें...

आखिर पुतिन-मोदी मीटिंग में कौन-कौन से बड़े समझौते हुए?

जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और रूस ने दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए:

  • सहयोग और प्रवास पर समझौता
  • अस्थायी श्रमिक गतिविधियों से जुड़ा समझौता

इन समझौतों का मतलब है कि अब दोनों देशों के बीच कामगारों की आवाजाही और रोजगार से जुड़ी प्रक्रियाएं और सुगम होंगी। इससे भारतीय कामगारों को रूस में नए अवसर मिल सकते हैं और रूस को भी विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा।

 

 

1: भारत-रूस शिखर सम्मेलन में दो बड़े समझौते-भारत कोक्या मिला?

PM मोदी और पुतिन ने अस्थायी श्रमिक गतिविधियों और प्रवासन सहयोग पर दो महत्वपूर्ण MoU का हस्ताक्षर किया। इससे दोनों देशों के बीच कामगारों के कानूनी एवं सुरक्षित आदान-प्रदान का रास्ता साफ हुआ है।

2: रूस में भारतीय कामगारों के लिए नए अवसर खुलेंगे

MoU के तहत रूस निर्माण, उद्योग और सर्विस सेक्टर में भारतीय कामगारों का सुरक्षित और रेग्युलेटेड प्रवेश सुनिश्चित करेगा। इससे स्किल्ड लेबर को बड़े अवसर मिल सकते हैं।

क्या अब भारतीय कामगारों के रूस जाने का रास्ता आसान होगा?

दोनों देशों के बीच हुए "अस्थायी श्रमिक गतिविधि" समझौते को भारत के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है।

यह समझौता:

  • भारत से रूस में स्किल्ड वर्कर्स भेजने की प्रक्रिया को आसान करेगा।
  • रोजगार से जुड़े दस्तावेज, वीज़ा और तकनीकी प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
  • मेडिकल, कंस्ट्रक्शन, आईटी और टेक्निकल सेक्टर में नए जॉब अवसर खोलेगा।
  • कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में भारत-रूस लेबर कॉरिडोर का आधार बन सकता है।

 

 

3: मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बड़ा फायदा-हेल्थ और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग

हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन पर हुआ समझौता दोनों देशों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और मेडिकल छात्रों के लिए प्रशिक्षण, शोध और एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा।

क्या मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर में भी बड़ा बदलाव आएगा?

पुतिन और मोदी की बैठक में हेल्थ सेक्टर पर भी जोर दिया गया।

रूस में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। दोनों देशों के बीच यह नया सहयोग:

  • मेडिकल एजुकेशन में गुणवत्ता
  • डिग्री रिकॉग्निशन
  • स्टूडेंट सुरक्षा
  • हेल्थ टेक्नोलॉजी
  • मेडिकल रिसर्च
  • जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोल सकता है।

यह कदम भारतीय छात्रों को सीधे लाभ पहुंचा सकता है।

4: पीएम मोदी ने पुतिन को क्या संदेश दिया? शांति, सुरक्षा और संकट पर क्या बोले?

जॉइंट कॉन्फ्रेंस में PM मोदी ने कहा कि COVID-19 से लेकर ऊर्जा संकट तक, दुनिया ने कई चुनौतियों का सामना किया है। दोनों देशों ने वैश्विक शांति और स्थिरता पर समान दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा, हमें वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटना होगा। भारत-रूस के आर्थिक संबंध नई ऊंचाइयों तक जाने चाहिए। शांति का रास्ता ही दुनिया का कल्याण कर सकता है। मोदी ने पुतिन से कहा कि दोनों देशों की साझेदारी 25 साल में और मजबूत हुई है और यह रिश्ता दूरदर्शी नेतृत्व की नींव पर आधारित है।

5: भारत-रूस आर्थिक संबंधों के लिए यह दौरा कितना अहम है? 

पीएम मोदी ने याद कराया कि पुतिन की 2001 की पहली भारत यात्रा ने रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव रखी थी, जिसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है। इस दौरे से उम्मीद है कि व्यापार बढ़ेगा, ऊर्जा सहयोग मजबूत होगा, रक्षा समझौते आगे बढ़ेंगे, नए टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट शुरू होंगे। 2030 तक दोनों देश 100 बिलियन डॉलर के ट्रेड का लक्ष्य रख रहे हैं।

6: यूक्रेन संकट पर भारत का शांति संदेश

PM मोदी ने स्पष्ट कहा कि दुनिया को शांति के रास्ते पर लौटना चाहिए और भारत हर शांति प्रयास का समर्थन करता है। पुतिन ने भी शांतिपूर्ण समाधान की इच्छा जताई। उन्होंने संकेत दिया कि भारत, रूस और दुनिया को संवाद के रास्ते समाधान खोजना होगा। यह इशारा सीधा यूक्रेन युद्ध से जुड़ा है, जहां भारत ने हमेशा शांति और बातचीत का पक्ष लिया है।

 

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