
नई दिल्ली: केंद्रीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भारतीय महाग्रंथों महाभारत व रामायण से कूटनीति सीखने की जरूरत को बयां किया है। जयशंकर ने भगवान श्री कृष्ण और रामभक्त हनुमान को दुनिया का सबसे बड़ा राजनयिक और कूटनीतिज्ञ बताया है। उन्होंने कहा कि हनुमान अपने मिशन से आगे बढ़ने की कहानी कहते हैं। वह मिशन के तहत पहले सीता से संपर्क करते हैं, फिर उनको श्रीराम का संदेशा देते हैं। फिर लंका में आग लगाकर बड़ी चेतावनी भी दे डालते। यह कोई सर्वश्रेष्ठ राजनयिक ही कर सकता था। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण रणनीतिक धैर्यता के सबसे बड़े उदाहरण हैं। श्री कृष्ण ने वचन दिया कि वह शिशुपाल की 100 गलतियों को माफ कर देंगे लेकिन 100वीं के अंत में वह उसे मार डालेंगे। यह एक अच्छे निर्णयकर्ता के सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक के महत्व को प्रदर्शित करता है।
एस.जयशंकर अपनी अंग्रेजी किताब "द इंडिया वे: स्ट्रैटेजीज़ फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड" के विमोचन के लिए पुणे में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसी तरह उन्होंने भारत के बहुध्रुवीय रूप को कुरुक्षेत्र से तुलना की। "रणनीतिक धोखे" के बारे में बोलते हुए जयशंकर ने सूर्यास्त का भ्रम पैदा करने वाले भगवान कृष्ण का उदाहरण दिया। उन्होंने ने अपने पड़ोसियों को चुनने के लिए भारत की भौगोलिक सीमाओं पर खेद व्यक्त किया। कहा कि यह हमारे लिए एक वास्तविकता है .... पांडव रिश्तेदारों को नहीं चुन सकते थे, हम अपने पड़ोसियों को नहीं चुन सकते थे। आतंकवाद से निपटने में अक्षमता के लिए पाकिस्तान को वैश्विक समुदाय से प्रतिक्रिया मिली है। संकट के समय अन्य देशों की सहायता करने के लिए इसे अपने तरीके सुधारने की आवश्यकता है। पाकिस्तान के पास अब बहुत कम सहयोगी हैं जिनमें से तुर्की पाकिस्तान की मदद करने की स्थिति में नहीं है। चीन कभी अनुदान नहीं देता, केवल ऋण देता है। उन्होंने कहा कि कर्ण और दुर्योधन की मित्रता से न तो उन्हें और न ही उनके परिवार को कोई लाभ हुआ। इसका समाज पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। इस दोस्ती ने उनके जीवन को निगल लिया और बड़े पैमाने पर विनाश, अपरिवर्तनीय क्षति और उनके रिश्तेदारों के लिए भयानक पीड़ा का कारण बना। कई देशों की ऐसी दोस्ती आपको दुनिया में देखने को मिल जाएगी।
दो मुर्खों की दोस्ती भी सांसत में डाल देती
जयशंकर ने कहा कि दो विस्फोटक जब एक साथ होते हैं, निश्चित रूप से एक दूसरे को प्रेरित करते हैं। इस प्रक्रिया में वे न केवल आसपास की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं बल्कि विनाश को गति देते हुए एक दूसरे का सफाया भी करते हैं। दो व्यक्तियों की मित्रता, मुख्य रूप से स्वभाव में बुराई, केवल एक दूसरे को और उनके आसपास के पूरे समाज को नुकसान पहुँचा सकती है।
जयशंकर ने उन्हें विदेश मंत्री बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया। ईएएम जयशंकर ने कहा कि विदेश सचिव बनना मेरी महत्वाकांक्षा की सीमा थी, मैंने कभी मंत्री बनने का सपना भी नहीं देखा था। उन्होंने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यकीन नहीं होता कि नरेंद्र मोदी के अलावा किसी और पीएम ने मुझे मंत्री बनाया होता।
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