
नेशनल डेस्क। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव फिर से अपने आध्यात्मिक कार्यों को लेकर संजीदा हो गए हैं। लोकसभा चुनाव में अपना वोट डालने के बाद अब वह भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के बीच संबंधों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए वह 10 दिन की यात्रा पर फिलहाल इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं।
बाली में उनका हुआ जोरदार स्वागत
मस्तिष्क की क्रिटिकल सर्जरी के बाद अब सदगुरु अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए दस दिनी दौरे पर इंडोनेशिया स्थित बाली आए हैं। बाली में उनका श्रद्धालुओं ने जोरदार स्वागत किया। बाली में भारत के महावाणिज्यदूत डॉ. शशांक विक्रम के साथ ही पर्यटन मंत्री सैंडियागा यूनो की टीम ने बाबा से मिलकर उनका हाल भी जाना। सद्गुरु कंबोडिया जाने से पहले देश के विभिन्न आध्यात्मिक स्थलों का दौरा करेंगे।
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इंडोनेशिया के पर्यटन मंत्री से की बात
इंडोनेशिया के पर्यटन मंत्री यूनो से बातचीत के दौरान सद्गुरु ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने ओडिशा की "बाली यात्रा" की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया जो कि बाली के साथ ओडिशा के लोगों के संबंधों को जोड़ता है। ओडिशा के पूर्वजों की बाली यात्रा का एक वार्षिक सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को मजबूत बनाता है। आयोजन में ओडिशा के लोग पूर्वजों की बाली यात्रा के प्रतीकात्मक संकेत के रूप में राज्य भर के पानी के स्रोतों में रंगीन कागज, सूखे केले के पेड़ की छाल आदि से बनी नाव तैराते हैं।
सद्गुरु संस्कृतियों और मंदिरों के पीछे का विज्ञान समझेंगे
सद्गुरु जग्गी संस्कृतियों और मंदिरों के पीछे के विज्ञान की गहराइयों को समझने की कोशिश करेंगे। वह बाली के बेसाकिह और तीर्थ एम्पुल मंदिरों समेत विभिन्न प्राचीन स्थानों का पता लगाएंगे जहां से ऊर्जा मिलती है। इंडोनेशिया और कंबोडिया में सद्गुरु की ये खोज लाखों लोगों तक सोशल मीडिया के जरिए पहुंच सकेगी।
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