
स्प्रिचुल डेस्क। बुद्ध पूर्णिमा पर आद देश भर में उत्सव का माहौल है। गुरु और शिष्य की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले इस पर्व को देश भर में हर धार्मिक शिष्य मानता है। इस मामले में सद्गुरु साईं कहते हैं कि बुद्ध बनो। वह बताते हैं कि बुद्ध बनने के लिए क्या जरूरी है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन वे बुद्ध के बुद्ध बनने तक का विस्तार से वर्णन करते हैं।
सद्गुरु कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आध्यात्म के रास्ते पर चल रहा है तो वह गौतम बुद्ध को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उनकी उपस्थिति इस पथ पर इतनी प्रभावशाली है। गौतम बुद्ध के जीवनकाल में उनके पास कुल 40 हजार भिक्षु थे दो आध्यात्म के प्रचार के लिए निकले थे। वे बताते हैं कि एक अध्यात्मिक साधक के रूप में यह दिन व्यक्ति के जीवन में काफी महत्वपूर्ण होता है।
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योगिक संस्कृति में बुद्ध पूर्णिमा महत्वपूर्ण
योगिक संस्कृति में बुद्ध पूर्णिमा हमेशा से ही महत्वपूर्ण रही है। किसी भी आध्यात्मिक साधक के जीवन में इस दिन का विशेष महत्व रहता है। यह हमेशा एक बहुत ही शुभ दिन होता है, लेकिन आज गौतम बुद्ध की स्मृति में हमने इसका नाम उनके नाम पर रखा है। सद्गुरु बताते हैं कि 2500 वर्ष पहले उस पूर्णिमा की शाम को एक मनुष्य एक प्राणी के रूप में विकसित हुआ।
जिस तरह की चीजों के संपर्क में आएं है, वैसी बात दिमाग में जमा
सद्गुरु कहते हैं कि आप जिस तरह की चीजों के संपर्क में आए हैं आपके दिमाग में वैसी ही बात बनेगी। इस बात पर गौर करें कि आप जिस भी तरह की परिस्थितियों के संपर्क में आए हैं, वैसे ही बात अपने दिमाग में जमा कर ली है। वह कहते हैं कि आपका दिमाग समाज का कूड़ादान है यहां लोग हर तरह की अच्छी खराब चीजें डालते हैं और आपको देखना है वह क्या खराब चीजें डाल रहे हैं। आपको अच्छी चीजें रखना है और खराब चीजें दिमाग से निकाल देना है। यह बस सरल मन है।
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