
Sadhguru condemned Bangladesh incident: बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा और हत्या की घटनाओं पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। देश के साधु-संतों ने भी बांग्लादेश की घटना पर चिंता जताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आध्यात्मिक धर्मगुरु सद्गुरु ने कहा कि लोकतांत्रिक बांग्लादेश में निरंकुश शासन की वजह से शर्मनाक घटनाएं हो रही है। हिंदू साधु की गिरफ्तारी बेहद शर्मनाक है।
सद्गुरु ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण प्रभु की गिरफ्तारी लोकतंत्र की हत्या है। उनकी गिरफ्तारी देश में हिंदू समुदाय पर हो रहे निरंतर हमलों और उत्पीड़न की श्रृंखला को उजागर करती है।
सद्गुरु ने X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए पोस्ट किया: एक लोकतांत्रिक देश का धर्म के आधार पर बिखरना और एक निरंकुश शासन की और बढ़ना शर्मनाक है। लोकतांत्रिक आज़ादी के महत्व को समझना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अल्पसंख्यक समुदाय या धर्म के आधार पर उत्पीड़न लोकतांत्रिक देशों का तरीका नहीं है। दुर्भाग्य से, हमारा पड़ोस लोकतांत्रिक सिद्धांतों से दूर हो गया है।।
सद्गुरु ने कहा कि बांग्लादेश के हर नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह एक लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण करे, जहां सभी नागरिकों के पास अपनी आवश्यकताओं और विश्वास के अनुसार अपने जीवन को चलाने के लिए आवश्यक अधिकार और क्षमता होगी।
सद्गुरु ने बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए लगातार अपना समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा: हिंदुओं के खिलाफ किए जा रहे अत्याचार केवल बांग्लादेश का आंतरिक मामला नहीं हैं। अगर हम अपने पड़ोस में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द खड़े नहीं होते और कार्यवाही नहीं करते, तो भारत महा-भारत नहीं बन सकता। जो इस राष्ट्र का हिस्सा था, वह दुर्भाग्य से पड़ोस बन गया, लेकिन इन लोगों को - जिनका वास्तव में इस सभ्यता से संबंध है - इन चौंकाने वाले अत्याचारों से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
सद्गुरु ने उग्रवाद को जड़ जमाने से रोकने के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने कहा: हमारे पड़ोस की दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकताएँ। आइए हम सुनिश्चित करें कि धार्मिक उग्रवाद हमारे प्यारे भारत पर कभी कब्ज़ा न कर पाए। सद्गुरु ने बांग्लादेशी हिंदुओं के जीवन और सम्मान की रक्षा के लिए कदम उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हो रही हिंसा में लक्षित हमले, मंदिरों का विनाश एक मानवीय संकट और लोकतांत्रिक मूल्यों के गहरे ह्रास को दर्शाता है।
बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हिंसा, आगजनी और हिंदू मंदिरों को अपवित्र करने की घटनाएं बढ़ गई हैं। अल्पसंख्यक समुदायों को धमकी, विस्थापन और हमले का सामना करना पड़ रहा है। त्यौहार और धार्मिक समारोह हिंसा का लक्ष्य बन गए हैं। इन अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे चिन्मय कृष्ण प्रभु को अरेस्ट किए जाने के बाद माहौल और खराब हो गया है।
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