
दिल्ली: हिंडनबर्ग खुलासे पर केंद्र सरकार ने चुप्पी साध रखी है। आरोपी व्यक्ति और सेबी दोनों ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दे दी है, ऐसा वित्त मंत्रालय के सचिव ने स्पष्ट किया है। अडानी के खिलाफ जांच सेबी जल्द से जल्द पूरी करे, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
अडानी के खिलाफ जांच कर रहे सेबी के चेयरपर्सन के खिलाफ हिंडनबर्ग का खुलासा एक बड़ा तूफान लेकर आया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है और संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग तेज हो गई है। वहीं, सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। सेबी चेयरपर्सन को हटाने की मांग पर वित्त मंत्रालय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस मामले में सेबी और आरोपी चेयरपर्सन माधबी पुरी पहले ही अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं और उन्हें और कुछ कहना नहीं है, ऐसा वित्त मंत्रालय के सचिव अजय सेठ का कहना है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने आरोप लगाया कि विदेशी ताकतें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही हैं।
इस बीच, अडानी के खिलाफ सेबी जांच जल्द से जल्द पूरी करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी के खिलाफ आरोपों के बाद संदेह के माहौल को दूर करने के लिए यह जरूरी है, ऐसा वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है।
अडानी समूह पर शेयर बाजार में हेरफेर का आरोप लगाने वाली हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर 2023 में विशाल तिवारी ने सीबीआई जांच या विशेष टीम से जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि सेबी जांच ही काफी है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद सेबी ने अपने बयान में कहा था कि अडानी के खिलाफ जांच में कोई चूक नहीं हुई है और 24 में से 23 आरोपों की जांच की जा चुकी है।
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