
नई दिल्ली। सीरो पॉजिविटी रिपोर्ट (Sero Survey) से देश में मौतों के आंकड़ों की गणना नहीं की जा सकती है। नीति आयोग (NITI Aayog) के सदस्य डॉ.वीके पाल (Dr.V.K. Paul) ने बताया कि सीरो पॉजिटिविटी शरीर में डेवलप होने की कई वजहें है। सीरो सर्वे रिपोर्ट के आधार पर देश में कोरोना की भयावहता का आंकलन करना गलत है।
आईसीएमआर ने राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ा पेश किया
डॉ.वीके पाल ने बताया कि सीरो सर्वे केवल यह अनुमान लगाने या आंकड़ा देखने के लिए कराया जाता है कि कितने लोगों के शरीर में एंटी बॉडी (Antibody) डेवलप कर गया है। आईसीएमआर (ICMR) ने देश में सीरो सर्वे किया है वह राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों या दृश्यों को प्रस्तुत करने के लिए किया गया है। करीब तीस हजार का सैंपल साइज लिया गया था।
एंटीबाड़ी डेवलप होने का मतलब यह नहीं कि कोई सीरियस रहा
उन्होंने बताया कि किसी के शरीर में अगर एंटीबाड़ी पाई गई है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह व्यक्ति सीरियस था या उसे कोई दिक्कत रही या वह बीमार होकर अस्पताल में भर्ती ही रहा है। वैक्सीन लगाए वाले लोगों के शरीर में भी सीरो पॉजिटिविटी पाई गई है। उनके अंदर भी एंटीबाड़ी डेवलप है। बहुत से ऐसे लोग हैं जो कोविड पॉजिटिव हुए और उनको पता भी चला ठीक हो गए। ऐसे लोगों के शरीर में भी एंटीबाड़ी बना हुआ है। ऐसे 80 प्रतिशत केस सामने आए हैं जिनको पता ही नहीं चला।
सीरो सर्वे से मौतों की भयावहता का आंकलन नहीं हो सकता
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि सीरो सर्वे की रिपोर्ट को पेश करते हुए देश में हुई मौतों का आंकलन करना गलत है। इस रिपोर्ट को पढ़कर, किसी तरह का अनुमान लगाना बिल्कुल ही अवैज्ञानिक तरीका है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
डॉ. पाल ने बताया कि देश में सीरो सर्वे इसलिए कराया गया ताकि इसका आंकलन किया जा सके कि एंटीबाड़ी डेवलपमेंट की स्थिति क्या है। हर्ड इम्युनिटी कितना असरकारी रहेगा।
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