Explained: क्या है मेथनॉल, जिसने तमिलनाडु में ली 37 लोगों की जान, क्यों है इतना खतरनाक

Published : Jun 20, 2024, 11:42 AM ISTUpdated : Jun 20, 2024, 03:05 PM IST
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सार

तमिलनाडु में जहरीली शराब पीने से 37 लोगों की मौत हो गई है। शराब में मेथनॉल पाया गया है। यह भी एक तरह का अल्कोहल है, लेकिन इंसान के लिए बेहद जहरीला होता है।

नई दिल्ली। तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में जहरीली शराब पीने से 37 लोगों की मौत हो गई। करीब 100 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने गोविंदराज नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने जहरीली शराब बेचा। पुलिस ने उसके पास से 200 लीटर शराब जब्त की है। जांच करने पर इसमें मेथनॉल पाया गया। आइए जानते हैं मेथनॉल क्या है और कितना खतरनाक है।

क्या है मेथनॉल?

मेथनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है। इसे वुड अल्कोहल भी कहा जाता है। यह आम शराब में पाए जाने वाले इथेनॉल की तुलना में इंसानों के लिए अधिक जहरीला होता है। इथेनॉल खमीर द्वारा शर्करा से फर्मेंटेशन से बनता है। वहीं, मेथनॉल लकड़ी के डिस्ट्रक्टिव डिस्टिलेशन से तैयार होता है। इसकी गंध इथेनॉल जैसी होती है, लेकिन कम मात्रा में भी यह बहुत जहरीला होता है।

शराब में कौन सा अल्कोहल होता है?

शराब को उसकी अल्कोहल कंटेंट के आधार पर अलग किया जाता है। बीयर में लगभग 5%, वाइन में लगभग 12% और डिस्टिल्ड स्पिरिट में लगभग 40% अल्कोहल (सभी में मात्रा के आधार पर) होता है। आनंद के लिए पिए जाने वाले पेय पदार्थों में अल्कोहल लगभग हमेशा इथेनॉल होता है। इथेनॉल एक साइकोएक्टिव ड्रग है। कम खुराक में लेने पर यह शरीर में न्यूरोट्रांसमिशन के स्तर को कम कर देती है। इससे इंसान को नशा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंबे समय तक इसका सेवन करने से लत लग जाती है। यह मौत का कारण बन सकता है।

क्या है नकली शराब?

नकली शराब में मेथनॉल भी मिला दिया जाता है। मेथनॉल का इस्तेमाल उद्योग में होता है। यह सस्ता होता है, जिसके चलते शराब के धंधेबाज इसे मिलाकर नकली शराब तैयार करते हैं। कई बार नशा बढ़ाने के लिए भी मेथनॉल मिलाया जाता है, जिससे शराब जहरीली हो जाती है और उसे पीने से लोगों की मौत होती है।

क्यों जानलेवा होता है मेथनॉल?

मेथनॉल आणविक स्तर पर इथेनॉल से केवल एक कार्बन और दो हाइड्रोजन परमाणुओं से अलग होता है। यह अंतर दोनों जहरों को शरीर से बाहर निकालने के लीवर के रास्ते को बदलने के लिए पर्याप्त है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार लीवर में इथेनॉल से अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज एंजाइम मिलता है। यह इथेनॉल को एसिटाल्डिहाइड नाम के दूसरे विषैले रसायन में बदल देता है। यह जहर जल्द ही हानिरहित कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में टूट जाता है।

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दूसरी ओर मेथनॉल का मेटाबॉलिज्म इतना आसान नहीं होता। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार 56-227 ml मेथनॉल पीने से भी एक वयस्क इंसान की मौत हो सकती है। मेथनॉल लीवर में जाता है तो अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज एंजाइम उसे फॉर्मेल्डिहाइड में बदलता है। यह प्रक्रिया धीमी होती है, जिसके चलते मेथनॉल के जहर के लक्षण सामने आने में कभी-कभी घंटों या दिन लग सकते हैं। मेथनॉल फॉर्मेल्डिहाइड में बदलने के बाद तेजी से प्रतिक्रिया करता है और फॉर्मिक एसिड में बदल जाता है। फॉर्मिक एसिड आंखों से जुड़ी तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता है। इससे पीड़ित अंधा हो जाता है। इसके चलते मौत तक हो जाती है।

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