
नई दिल्ली. शिवसेना ने सामना के जरिए भाजपा पर निशाना साधा। सामना के संपादकीय में लिखा गया कि पश्चिम बंगाल से पुडुचेरी तक और महाराष्ट्र से जम्मू-कश्मीर तक दलबदलुओं के लिए लाल कालीन बिछाना और राजनीतिक मोहरों का खेल चलना किसी को शोभा नहीं देता। पुडुचेरी हो गया, अब महाराष्ट्र, का स्वप्न जो लोग देख रहे हैं वे सपना देखते रहें। महाराष्ट्र का निर्णय यही जनमानस है। उसमें बदलाव नहीं होगा। महाराष्ट्र का मन गंभीर है और इरादे पक्के हैं। मध्य प्रदेश और पुडुचेरी का खेल महाराष्ट्र की माटी में नहीं चल पाएगा। आखिरकार, राजनीति का एक मंत्र महत्वपूर्ण है जो सब पर लागू होता है। जो बोओगे वही काटोगे इसका ध्यान हर सत्ताधीश रखे तो ठीक है!
"पुडुचेरी में विधायक कमल के फूल के भंवरे बन गए"
"पुडुचेरी केंद्र शासित और छोटा राज्य है। 30 निर्वाचित विधायकों और 3 मनोनीत विधायकों को मिलाकर कुल 33 विधायकों की विधानसभा है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने ये छोटा राज्य भी कांग्रेस से खींच लिया है। पुडुचेरी की कांग्रेस सरकार गिर गई है। मुख्यमंत्री नारायण सामी की सरकार को समर्थन देनेवाले पांच विधायकों द्वारा मेंढकों की तरह कूदने के कारण सामी की सरकार अल्पमत में आ गई। पांच विधायकों ने साढ़े चार साल तक कांग्रेस की सरकार को समर्थन दिया। उसमें अण्णाद्रमुक के विधायक भी थे लेकिन अब ये सारे विधायक कमल के फूल के भंवरे बन गए हैं।"
"अब मार्च-अप्रैल महीने में महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन लोटस' की शुरुआत करेंगे"
"विधानसभा चुनाव में लगभग चार महीने हैं। तब तक भाजपा या केंद्र सरकार रुक सकती थी। लेकिन वहां की सरकार को गिराकर दिखाया, ऐसा दंभ भरने के लिए भाजपा मुक्त हो गई है। पुडुचेरी की सरकार गिराकर दिखा दिया, अब मार्च-अप्रैल महीने में महाराष्ट्र में ऑपरेशन लोटस की शुरुआत करेंगे, भाजपा के कुछ नेताओं ने ऐसा कहा है। मध्य प्रदेश की सरकार गिराई तब भी अगला वार महाराष्ट्र पर की घोषणा की गई थी। उसके बाद ‘बिहार का परिणाम आने दो, फिर देखो महाराष्ट्र में वैसे परिवर्तन लाते हैं, जैसी बातें की गर्इं।"
"जैसे दिल्ली बहुत दूर है उसी प्रकार महाराष्ट्र तो बहुत ही दूर है!"
"अब पुडुचेरी की बात शुरू है लेकिन जैसे दिल्ली बहुत दूर है उसी प्रकार महाराष्ट्र तो बहुत ही दूर है! जैसी तस्वीर है। वहीं मध्य प्रदेश और पुडुचेरी में कांग्रेस थी। महाराष्ट्र में शिवसेना है इसलिए कोई अनावश्यक उठापटक के चक्कर में न पड़े। पुडुचेरी में सरकार गिराने के लिए जो खटपट और भागदौड़ की गई वो सारा प्रयोग महाराष्ट्र में किया जा चुका है।"
"किरण बेदी को भी कढ़ी पत्ते की तरह उपयोग करके फेंक दिया गया"
"पुडुचेरी की नायब राज्यपाल किरण बेदी ने सामी की सरकार को ठीक से काम नहीं करने दिया। यह राज्य केंद्रशासित होने के कारण वहां के राज्यपाल को कुछ ज्यादा ही अधिकार होता है। इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा जनहित में लिए गए हर निर्णय को किरण बेदी बदलने लगीं। हालांकि, दिल्ली के आदेश के बिना नायब राज्यपाल ऐसा बर्ताव नहीं करेंगे। राज्यपाल महाराष्ट्र के हों या पुडुचेरी के, उन्हें दिल्ली का आदेश मानते हुए ही उठापटक करनी पड़ती है। राज्यपाल का उपयोग भोजन की थाली के कढ़ी पत्ते जैसा किया जाता है। किरण बेदी को भी कढ़ी पत्ते की तरह उपयोग करके फेंक दिया गया है, महाराष्ट्र में छौंक लगानेवाले भाजीपालों को ये बात समझ लेनी चाहिए।"
केंद्रीय सत्ता का उपयोग करके विरोधियों के राज्य की सरकार को गिराना कुछ लोगों को वीरता का काम लगता होगा तो ये उनकी गलतफहमी है। मध्य प्रदेश में महाराजा सिंधिया और उनके समर्थकों को तोड़कर और लालच दिखाकर भाजपा ने बहुमत खरीद लिया। पुडुचेरी में भी अलग क्या हुआ? पुडुचेरी में फिलहाल जो कुछ हो रहा है यह राजनैतिक वेश्या व्यवसाय है, ऐसा संताप मुख्यमंत्री नारायण सामी ने व्यक्त किया है। लेकिन इस वेश्या व्यवसाय से गत 70 सालों में कोई अलिप्त रहा है क्या? सरकार को समर्थन देनेवाले विधायकों को तोड़ने के लिए ईडी, सीबीआई और इन्कम टैक्स आदि यंत्रणा का प्रयोग किया गया, ऐसा आरोप कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने लगाया है।
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