
नई दिल्ली. कई दौर की वार्ताओं के बाद भी किसान आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया है। इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनका दावा है कि किसान आंदोलन के पीछे कोई अदृश्य ताकत काम कर रही है। वो नहीं चाहती कि इस समस्या का हल निकले। हालांकि कृषि मंत्री ने किसी पार्टी या नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि हर बातचीत के बाद किसानों के सुर बदल जाते हैं। कृषि मंत्री एक मीडिया हाउस से चर्चा कर रहे थे। तोमर ने दु:ख जतातो हुए कहा कि किसान सिर्फ कानूनों को रद्द करने की मांग पर अडे़ हुए हैं। वे इसके फायदे पर चर्चा ही नहीं करना चाहते। कोई अदृश्य ताकत इस मसले को हल नहीं होने देना चाहती।
किसानों का दावा रैली की अनुमति मिली
इस बीच किसान समूहों ने दावा किया है कि उन्हें गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई है। बता दें कि किसान नवंबर के आखिर से सिंघु, टिकरी और गाजीपुर सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे पिछले साल सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग उठा रहे हैं। इस बीच कृषि मंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस देश का पर्व है। इस पर पूरी दुनिया की नजर होती है। आंदोलन के लिए 365 दिन हैं, 26 जनवरी के अलावा किसी दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया जा सकता है। कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि किसान गणतंत्र दिवस की गरिमा बनाए रखेंगे।
किसानों ने ट्रैक्टर मार्च का रूट सौंपा
दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के लिए रूट मैप पर सहमति बन गई है। मार्च इन चार रूटों पर निकलेगा।
1. सिंघु रूट (74 किमी) NH44-मुनीम का बाग-नरेला-बवाना-औचंडी बॉर्डर-खारखोदा-कुंडली-सिंघु बॉर्डर
2. टिकरी रूट (82.5 किमी) टिकरी बॉर्डर-नांगलोई-बपरौला गांव-नजफगढ़-झड़ौदा बॉर्डर-बहादुरगढ़-असोदा
3. गाजीपुर रूट (68 किमी) गाजीपुर बॉर्डर-अपसरा बॉर्डर-हापुड़ा रोड-IMM कॉलेज-लाल कुंआ-गाजीपुर बॉर्डर
4. चिल्ला रूट (10 किमी) चिल्ला बॉर्डर-क्राउन प्लाजा रेड लाइट-डीएनडी फ्लाइवे-दादरी रोड-चिल्ला बॉर्डर
कानून होल्ड करने की बात पर भी नहीं मानें
इससे पहले सरकार ने किसानों के साथ हुई मीटिंग में प्रपोजल दिया था कि कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक होल्ड किया जा सकता है। तब लगा रहा था कि शायद किसान मान जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान कानून रद्द कराने पर ही अड़े हैं।
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