
नई दिल्ली। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit 2023) में भारत ने अपनी समृद्ध विरासत की झलक दुनिया को दिखाई। सम्मेलन में आए मेहमानों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार की शाम डिनर का आयोजन किया था। इस दौरान दुनिया को भारतीय संगीत विरासत की झलक देखने को मिली।
जी20 डिनर में पूरे देश के पारंपरिक संगीत की झलक दिखाई गई। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'गंधर्व अटोद्यम' था। यह एक अद्वितीय संगीतमय मिश्रण है जिसमें पूरे भारत के संगीत वाद्ययंत्रों की एक उत्कृष्ट सिम्फनी शामिल है। इसमें शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के समूह के साथ हिंदुस्तानी, कर्नाटक, लोक और समकालीन संगीत का प्रदर्शन किया गया।
इन संगीत का किया गया प्रदर्शन
हिंदुस्तानी संगीत: राग दरबारी कांदा और काफी-खेलत होरी
लोक संगीत: राजस्थान - केसरिया बालम, घूमर और निम्बुरा निम्बुरा
कर्नाटक संगीत: राग मोहनम - स्वागतम कृष्ण
लोक संगीत: कश्मीर, सिक्किम और मेघालय - बोम्रू बोम्रू
हिंदुस्तानी संगीत: राग देश और एकला चलो रे
लोक संगीत: महाराष्ट्र - अबीर गुलाल (अभंग), रेशमा चारे घानी (लावनी), गजर (वारकरी)
कर्नाटक संगीत: राग मध्यमावती - लक्ष्मी बरम्मा
लोक संगीत: गुजरात- मोरबानी और रामदेव पीयर हेलो
पारंपरिक और भक्ति संगीत: पश्चिम बंगाल - भटियाली और अच्युतम केशवम (भजन)
लोक संगीत: कर्नाटक - मदु मेकम कन्नै, कावेरी चिंदु और आद पम्बे
भक्ति संगीत: श्री राम चंद्र कृपालु, वैष्णव जन और रघुपति राघव
हिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक संगीत: राग भैरवी- दादरा, मिले सुर मेरा तुम्हारा
कई दुर्लभ वाद्ययंत्रों का हुआ इस्तेमाल
जी20 डिनर के दौरान पेश किए गए संगीत कार्यक्रम में कई दुर्लभ वाद्ययंत्रों को भी देखने का मौका मिला। इन वाद्ययंत्रों में सुरसिंगार, मोहन वीणा, जलतरंग, जोडिया पावा, धंगाली, दिलरुबा, सारंगी, कमाइचा, मट्टा कोकिला वीणा, नलतरंग, तुंगबुक, पखावज, रबाब, रावणहत्था, थाल दाना, रुद्र वीणा आदि शामिल हैं।
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