सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- वे नहीं चाहते कि उनकी जाति के भी लोग बढ़ें

Published : Aug 23, 2019, 02:18 PM ISTUpdated : Aug 23, 2019, 02:25 PM IST
सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- वे नहीं चाहते कि उनकी जाति के भी लोग बढ़ें

सार

 कर्नाटक में सरकार गिरने के एक महीने के भीतर ही कांग्रेस और जेडीएस में कड़वाहट खुलकर सामने आ गई। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

बेंगलुरु. कर्नाटक में सरकार गिरने के एक महीने के भीतर ही कांग्रेस और जेडीएस में कड़वाहट खुलकर सामने आ गई। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि देवगौड़ा नहीं चाहते कि कोई और बढ़े। यहां तक कि वे यह भी नहीं चाहते कि उनकी जाति के लोग बढ़ें। उन्होंने कहा कि मेरे सभी जातियों और सभी पार्टियों में अच्छे दोस्त हैं। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने और देवगौड़ा ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक साथ प्रचार किया। वे अपने और अपने पोते की हार के लिए मुझे जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्हें ये बताना चाहिए कि हमारे प्रत्याशी क्यों हारे। इसके पीछे क्या कारण है। क्या उन्होंने ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई की, जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया।

लोकसभा चुनाव हार गए थे देवगौड़ा और उनके पोते
लोकसभा चुनाव में अन्य राज्यों की तरह ही भाजपा ने कर्नाटक में बेहतरीन प्रदर्शन किया। यहां पार्टी ने 28 में से 26 पर जीत हासिल की। यहां मोदी लहर के चलते पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा और उनके पोते और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के बेटे निखिल भी चुनाव हार गए। देवगौड़ा ने तुमकुर सीट से चुनाव लड़ा था, उन्हें भाजपा के जीएस बासवराज ने हराया। इसके अलावा निखिल ने मांड्या से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें भाजपा समर्थित निर्दलीय  सुमलता अमरीष ने मात दी।

23 जुलाई को गिर गई थी कुमारस्वामी सरकार
मई 2018 में कांग्रेस-जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी। कम सीटों के बावजूद जेडीएस के कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, ये सरकार सिर्फ 14 महीने चली। 23 जुलाई को कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार गिर गई थी। इससे पहले 15 विधायकों से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद फ्लोर टेस्ट में कुमारस्वामी बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। विधायकों की संख्या 204 थी और बहुमत के लिए 103 का आंकड़ा जरूरी था। कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विरोध में 105 वोट पड़े थे। 

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