
नई दिल्ली। जूते-चप्पल की मरम्मत का काम करने वाले लोगों की ओर न तो सरकार की नजर जाती है और न ही समाज उनके योगदान को सम्मान दे पाता है, जबकि भारतीय समाज कर्म प्रधान रहा है। यहां कर्म के आधार पर कभी भेदभाव नहीं हुआ। हां देश में भाई चारे और सामाजिक सद्भाव को तोड़ने वाली ताकतें हमेशा इस कोशिश में रहती हैं कि कैसे मौका पाकर वह हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को चोट पहुंचाएं।
मयूर विहार में पिछले दिनों जूते चप्पल सुधारने का काम करने वाले रामावतार के साथ कुछ लोगों ने समाजिक रूप से भेदभावजनक व्यवहार किया था। इससे उनके भीतर हीन भावना घर कर रही थी।
ये बात जैसे ही स्थानीय लोगों व समाज सेवी जनों को मिली तो उन्होंने रामावतार से मिलकर उसे इस बात का भरोसा दिलाया कि वह समाज के अभिन्न अंग हैं। जाति पंथ का भेदभाव भारत विरोधी विचार है। इसे सुनकर रामावतार अत्यंत भावुक हो गए। इसी क्रम में स्थानीय लोगों ने मयूर विहार में काम करने वाले मोचियों को सम्मानित करते हुए उन्हें उनकी आजीविका से जुड़ी वस्तुओं की किट प्रदान की। इसे जूते चप्पलों का ब्यूटी पार्लर नाम दिया गया।
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