
नई दिल्ली: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से रिक्वेस्ट किया है कि उसे चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने के लिए 30 जून तक की मोहलत दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी प्रकार के इलेक्टोरल बॉन्ड को अवैध घोषित करते हुए आगे इसकी प्रैक्टिस पर रोक लगाते हुए रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने एसबीआई को जारी हुए सभी इलेक्टोरल बांड की जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को देने का आदेश दिया था।
चुनाव आयोग को 13 मार्च तक पब्लिश करनी है बॉन्ड की जानकारियां
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को यह निर्देश दिया था कि वह चुनाव आयोग को 6 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारियां शेयर कर दे। चुनाव आयोग को कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह सभी बॉन्ड की जानकारियों को 13 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर पब्लिश कर दे। बॉन्ड के माध्यम से किस पार्टी को किसने कितने पैसे दान में दिए यह सब सामने आ जाता। लेकिन स्टेट बैंक ने अभी तक इस बाबत कोई तैयारी नहीं की है। अब वह सुप्रीम कोर्ट से मोहलत मांग रहा है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद चुनावी बांड योजना को इस आधार पर समाप्त कर दिया कि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि चुनावी बांड योजना असंवैधानिक और मनमानी है और इससे राजनीतिक दलों और दानदाताओं के बीच लेनदेन की व्यवस्था हो सकती है। पांच जजों की संविधान पीठ ने माना कि काले धन से लड़ने और दानदाताओं की गोपनीयता बनाए रखने का घोषित उद्देश्य इस योजना का बचाव नहीं कर सकता। चुनावी बांड काले धन पर अंकुश लगाने का एकमात्र तरीका नहीं है। यह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है। इसलिए इसे रद्द किया जाता है। चुनावी बॉन्ड में सबसे अधिक दान अकेले भारतीय जनता पार्टी को मिली है।
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