कांग्रेस के संपत्ति कर और विरासत कर के विचार पर भड़के छात्र, दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर किया प्रदर्शन

Published : May 01, 2024, 11:59 AM ISTUpdated : May 01, 2024, 12:39 PM IST
protes against congress

सार

कांग्रेस की ओर से देश में संपत्ति कर और विरासत कर को लेकर उठाए गए मुद्दे के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन शुरू हो गया है। छात्र दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के सामने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।  

नई दिल्ली। कांग्रेस की ओर से उठाया गया संपत्ति कर और विरासत कर का मुद्दा अब उसकी गले की फांस बन गया है। दिल्ली में बुधवार को संपत्ति कर और विरासत को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गया है। छात्रों ने कांग्रेस के संपत्ति कर और विरासत कर को लेकर प्रस्तुत किए गए विचार को लेकर विरोध शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में छात्रों के समूह ने हाथों में तख्तियां लेकर संपत्ति कर और विरासत कर के कांग्रेस के विचार की खिलाफत शुरू कर दी है। 

'70 साल में न दिया जल, न बत्ती अब छीनेंगे संपत्ति'
हाथों में तख्तियां लेकर छात्र कांग्रेस मुख्यालय के पास प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों  के हाथों में लिखी तख्तियों में सरकार और राहुल गांधी को लेकर कई सारे नारे लिखे हुए हैं। छात्रों की ओर से ली गई तख्तियों पर लिखा है, ‘70 साल में न दिया जल, न बत्ती अब छीनेंगे संपत्ति’, 'राहुल के पास मां और माओ दोनों', 'पहले लेंगे आपके वोट फिर ले जाएंगे आपके मंगलसूत्र और नोट' आदि स्लोगन लिखे हुए हैं। कांग्रेस मुख्यालय के सामने छात्र-छात्राओं का ग्रुप विरासत कर और संपत्ति कर का विरोध कर रही है।

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भाजपा भी लगातार कर रही हमला
संपत्ति कर और विरासत कर मामले को मुद्दा बनाकर भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमला बोल रही है। चुनावी रैलियों से लेकर हर प्रकार के कार्यक्रमों में भाजपा कांग्रेस की ओर से उठाए गए विरासत के मुद्दे का जिक्र कर चुनावी लाभ उठा रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान इसे मुद्दा बनाकर भाजपा अब पूरी तरह से कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतर चुकी है। 

सैम पित्रोदा के बयान के बाद छिड़ा विवाद
कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने एक बयान में अमेरिका में विरासत कर लागू होने की बात पर चर्चा करते हुए भारत में भी इस पर विचार करने और खुले मंच पर चर्चा करने की बात कही थी। उन्होंने विरासत कर की सराहना करते हुए बताया था कि व्यक्ति की मौत के बाद उसकी कुल संपत्ति का 55 फीसदी हिस्से पर उसे बच्चों या परिजनों का नहीं सरकार का हक होगा। उनके विरासत की सराहना करने और भारत में भी इस टैक्स पर चर्चा करने के बयान ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। 

 

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