अडानी-हिंडनबर्ग मामला: SC ने SEBI पर विश्वास जताया, फैसले के दौरान CJI ने कही यह 5 बड़ी बातें

Published : Jan 03, 2024, 02:29 PM IST
supreme court

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले (Adani-Hindenburg Case) में सेबी को मिली क्लीन चिट को स्वीकार किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सेबी से यह जांच लेकर एसआईटी को सौंपने का कोई आधार नहीं है। 

Adani-Hindenburg Case. सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में स्पेशल एक्सपर्ट कमिटी ने सेबी को क्लिन चिट दी थी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते वक्त इस तथ्य को स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सेबी से यह मामला लेकर एसआईटी को सौंपने का कोई आधार नहीं है। सीजेआई ने फैसले के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ न्यूज पेपर की रिपोर्ट पर ही पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी पर विश्वास जताया

अडानी-हिंडनबर्ग मामले में फैसला सुनाते वक्त सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेपी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा किया केस स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम को सौंपने का कोई आधार नहीं है। इस मामले से जुड़े 24 में से 22 केस की जांच सेबी ने की है। बाकी के 2 केस की जांच के लिए सेबी को 3 महीने का समय दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेबी को आदेश दिया है कि यह जांच की जानी चाहिए शार्टिंग के दौरान किसी तरह के नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया है। यदि ऐसा है तो कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

  1. भारत सरकार और सेबी इस बात पर गौर करेंगे कि क्या शॉर्ट सेलिंग पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट द्वारा कानून का कोई उल्लंघन हुआ है। यदि हां तो कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
  2. सेबी ने 24 में से 22 मामलों में जांच पूरी कर ली है। सॉलिसिटर जनरल के आश्वासन को ध्यान में रखते हुए हम सेबी को अन्य 2 मामलों में तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश देते हैं।
  3. जांच स्थानांतरित करने की शक्ति का प्रयोग असाधारण परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। ठोस कारण के अभाव में ऐसी शक्तियों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
  4. वैधानिक नियामक पर सवाल उठाने के लिए अखबारों की रिपोर्टों और तीसरे पक्ष के संगठनों पर निर्भरता विश्वास को प्रेरित नहीं करती है। इन्हें सेबी जांच पर संदेह का इनपुट तो माना जा सकता है लेकिन निर्णायक सबूत नहीं।
  5. सामान्य नागरिकों तक पहुंच के लिए सार्वजनिक हित न्याय शास्त्र विकसित किया गया था। जिन याचिकाओं में पर्याप्त रिसर्च की कमी है और अप्रमाणित रिपोर्टों पर भरोसा किया गया है, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्या है अडानी-हिंडनबर्ग मामला

हिंडनबर्ग की रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अडानी ने कृत्रिम रूप से अपने शेयरों की कीमतें बढ़ा दीं। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के एक हिस्से में कहा गया है कि इससे अडानी की कंपनियों के शेयर मूल्य में भारी गिरावट आई, जिसका अनुमान लगभग 100 बिलियन डॉलर है। इस मामले को लेकर राजनीति भी काफी गर्म रही। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मामले की जांच की डिमांड की गई। एक याचिक यह भी रही कि सेबी ने अडानी की कंपनियों को बचाने का काम किया। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया। साथ ही रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमिटी भी गठित की गई। कमेटी ने पाया कि सेबी की तरफ से कोई चूक नहीं की गई है।

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