
नई दिल्ली: देश में अश्लील वीडियो पर बैन लगाने के लिए कानून बनाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने नेपाल में हुए जेन-Z विरोध का ज़िक्र करते हुए जवाब दिया। उन्होंने पूछा, "सोशल मीडिया पर बैन लगाने से नेपाल में क्या हुआ? उसका नतीजा क्या था? यह तो सबने देखा ही है।"
सितंबर 2025 में नेपाल में हुआ जेन-Z विरोध, देश में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, आर्थिक संकट और बेरोजगारी को लेकर सरकार के खिलाफ एक बड़ा युवा आंदोलन था। देश में लंबे समय से सुलग रही सरकार विरोधी भावना, 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने के सरकारी कदम के बाद भड़क उठी थी।
इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। कोर्ट की इस टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि नेपाल का अनुभव इस बात की याद दिलाता है कि कैसे डिजिटल कंटेंट पर पाबंदियां बड़ी अशांति का कारण बन सकती हैं। इस जनहित याचिका में सार्वजनिक जगहों पर अश्लील कंटेंट पर बैन लगाने और नाबालिगों को इसे देखने से रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की मांग की गई थी।
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