सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने फिर भेजी 5 जजों की लिस्ट, प्रमोशन की पिछली लिस्ट को केंद्र ने कर दी थी खारिज

Published : Dec 13, 2022, 09:41 PM ISTUpdated : Dec 13, 2022, 10:16 PM IST
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने फिर भेजी 5 जजों की लिस्ट, प्रमोशन की पिछली लिस्ट को केंद्र ने कर दी थी खारिज

सार

कॉलेजियम के सुझाए गए नामों की सूची को केंद्र सरकार द्वारा खारिज कर वापस करने के बाद पांच नामों की एक और लिस्ट भेजी गई है। नई सिफारिश में बिहार, राजस्थान, मणिपुर और यूपी के जजों के नाम है।

Supreme Court Collegium: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बार फिर पांच जजों के नामों को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन के लिए सिफारिश की है। कॉलेजियम के सुझाए गए नामों की सूची को केंद्र सरकार द्वारा खारिज कर वापस करने के बाद पांच नामों की एक और लिस्ट भेजी गई है। नई सिफारिश में बिहार, राजस्थान, मणिपुर और यूपी के जजों के नाम है। जस्टिस दीपांकर दत्ता के शपथ लेने के बाद मंगलवार को मैराथन मीटिंग में विभिन्न हाईकोर्ट्स के जजों को प्रमोट करने की लिस्ट फाइनल की गई। जस्टिस दत्ता की नियुक्ति के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जजेस की संख्या स्वीकृत 34 की संख्या के सापेक्ष 28 हो चुकी है।

इन जजों के नामों की कॉलेजियम ने की सिफारिश

CJI डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में कॉलेजियम ने मीटिंग कर पांच जजों के नामों की लिस्टिंग कर हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मिथल, पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीवी संजय कुमार के नाम को इस लिस्ट में रखा है। इसके अलावा कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज मनोज मिश्रा, पटना हाईकोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह के नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के लिए की है।

बीते महीने 19 नामों को खारिज कर दिया 

केंद्र सरकार ने कॉलेजियम द्वारा प्रमोशन के लिए भेजे गए 19 जजों के नामों को खारिज कर दिया गया था। कॉलेजियम ने बीते दिनों कुछ नामों को दोहराते हुए फिर भेजा लेकिन उसे भी सरकार ने खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वापसी पर जताई थी नाराजगी

पिछले हफ्ते कॉलेजियम व केंद्र सरकार के टकराहट पर सुनवाई करते हुए जस्टिस किशन कौल, जस्टिस अभय एस.ओका और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने सरकार को फटकार लगाई थी। बेंच के जस्टिस कौल ने कहा कि उचित समय के भीतर एक निर्णय लिया जाना चाहिए। एक बार एक नाम दोहराए जाने के बाद आपको (सरकार) नियुक्त करना होगा। आप दो बार, तीन बार नाम वापस भेज रहे हैं इसका मतलब है कि आप कॉलेजियम को नकार रहे हैं। जब तक कोलेजियम सिस्टम है, आपको इसे लागू करना होगा। यदि आप एक नया कानून लाना चाहते हैं तो आप ला सकते हैं लेकिन जब तक वर्तमान कानून मौजूद है, आपको इसका पालन करना होगा। हमारा काम कानून को लागू करना है जैसा कि आज मौजूद है। यह पिंग पोंग लड़ाई कब तक चलेगी? हालांकि, केंद्र ने पहले एक हलफनामा दायर कर कहा था कि न्यायिक नियुक्तियों के मामलों में समयसीमा उचित नहीं है।

यह भी पढ़ें:

आतंक मुक्त होगी कश्मीर घाटी: 2022 में 142 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, अब बचे सिर्फ 23

कुकी-चिन नेशनल फ्रंट के 300 सशस्त्र बांग्लादेशी विद्रोही बार्डर पार कर पहुंचे मिजोरम, इन गांवों में बना बसेरा

भारत व चीनी सैनिकों के बीच LAC पर झड़प, सेना ने किया घुसपैठ को नाकाम, ड्रैगन को अधिक नुकसान

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

बाइक पर पत्नी ने 27 सेकेंड में पति को जड़े 14 थप्पड़, देखें Viral Video
Viral Road Rage Video: HR नंबर प्लेट Thar के कारनामें ने इंटरनेट पर मचाई खलबली