
नई दिल्ली। कर्नाटक हिजाब मामले (Karnataka Hijab row) की तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोेर्ट (Supreme court) ने गुरुवार को इनकार कर दिया। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। छात्राअों को स्कूल यूनिफॉर्म का पालन करना होगा। इस फैसले काे चुनौती देने वाली याचिका वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने लगाई है। छात्राओं का पक्ष रखते हुए कामत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की वजह से परीक्षा में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, सीजेआई (CJI) ने हिजाब का परीक्षा से कोई संबंध होने से इंकार करते हुए तुरंत सुनवाई से मना कर दिया।
छात्राओं ने परीक्षा में बैठने से किया था इंकार
दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को इस मामले को लेकर अपना फैसला सुनाया था। 11 दिन चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इस फैसले के विरोध में उसी दिन कई छात्राओं ने हिजाब की अनुमति न मिलने पर परीक्षा छोड़ दी थी। छात्राओं के विरोध को देखते हुए सरकार ने भी तल्ख रुख अपनाया था। राज्य के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा था कि जो छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं होंगी, उनके लिए दोबारा परीक्षा आयोजित नहीं कराई जाएगी। उन्होंेने कहा कि जानबूझकर गैरहाजिर रहने वाली छात्राओं के लिए दोबारा परीक्षा कराने का कोई नियम नहीं है।
उडुपी से शुरू हुआ था मामला
कर्नाटक में हिजाब का मामला उडुपी से दिसंबर में शुरू हुआ था। यहां पीयू कॉलेज की कुछ छात्राओं ने प्रिंसिपल ऑफिस जाकर हिजाब पहने बिना आने से मना कर दिया। इसके बाद मांड्या में भी ऐसा ही विवाद हुआ। मुस्लिम छात्राओं ने हिजाब न पहनने देने को मुद्दा बनाते हुए कॉलेजों के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। इसके विरोध में कुछ छात्र भगवा गमछा पहनकर कॉलेज पहुंच गए। मामला बढ़ा तो सरकार ने धार्मिक पोशाक पहनकर स्कूल-कॉलेज जाने पर रोक लगा दी। इसके बाद 8 छात्राओं ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई।
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हाईकोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
15 मार्च को कर्नाटक हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम में जरूरी धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम छात्राओं की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि स्कूल की यूनिफॉर्म पर छात्राएं आपत्ति नहीं उठा सकती हैं।
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