
Delhi Liquor Case: दिल्ली शराब नीति केस में अरेस्ट किए गए मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत नहीं दी है। अभी उनको तिहाड़ जेल में ही रहना होगा। महाराष्ट्र बीजेपी के उपाध्यक्ष हितेश जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया है क्योंकि 338 करोड़ रुपये की धनराशि के ट्रांसफर के संबंध में अस्थायी कनेक्शन स्थापित हुआ है।
हितेश जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से न केवल मनीष सिसोदिाय बल्कि आम आदमी पार्टी का बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गलत और बेशर्म बयानबाजी कर रहे कि अदालत ने माना है कि AAP के खिलाफ ईडी और सीबीआई के मामले फर्जी हैं। उन्होंने कहा कि मामले फर्जी है तो सिसोदिया को जमानत पर रिहा क्यों नहीं किया गया।
बीजेपी मुंबई प्रदेश उपाध्यक्ष जैन ने कहा कि AAP का गठन भ्रष्टाचार को खत्म करने के लक्ष्य के साथ किया गया था। इसके सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक की जमानत भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक मामले में खारिज कर दी है। इससे न केवल आप की बेगुनाही का मुखौटा उतर गया है बल्कि शराब घोटाले का सच भी जनता के सामने आ गया है। आप नेता और मंत्री जनता को गुमराह कर रहे थे और अदालत के आदेशों की गलत व्याख्या करने के नए स्तर पर पहुंच गए थे।
सोमवार को मनीष सिसोदिया की जमानत खारिज
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की बेंच ने सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज की। बेंच ने 17 अक्टूबर को सिसौदिया द्वारा दायर दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा कि 338 करोड़ रुपये के ट्रांस्फर के संबंध में एक पहलू अस्थायी रूप से स्थापित है। इसलिए हमने जमानत के लिए आवेदन खारिज कर दिए हैं। अभियोजन पक्ष ने आश्वासन दिया है कि मुकदमा छह से आठ महीने के भीतर समाप्त हो जाएगा। तीन महीने के भीतर यदि मुकदमा लापरवाही से या धीमी गति से आगे बढ़ता है तो सिसोदिया जमानत के लिए आवेदन दायर करने के हकदार होंगे।
सीबीआई ने 26 फरवरी को सिसोदिया को किया था गिरफ्तार
मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 9 मार्च को उन्हें तिहाड़ जेल में ही ईडी ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए जाने से पहले सिसोदिया उपमुख्यमंत्री होने के साथ ही दिल्ली सरकार में आबकारी विभाग के मंत्री भी थे। उनके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति बनाई और लागू किया। नई आबकारी नीति लागू होने के बाद आरोप लगे कि आप सरकार द्वारा अपने चहेते शराब कारोबारियों को गलत तरीके से लाइसेंस दिए गए। इसके बदले में रिश्वत ली गई। मामले के तूल पकड़ने पर आप सरकार ने नई शराब नीति को रद्द कर दिया था और पुरानी नीति लागू कर दी थी। दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीबीआई को पत्र लिखकर शराब घोटाले की जांच करने को कहा था। इसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज किया और जांच शुरू की। शराब घोटाले में हुई मनी लॉन्डिंग की जांच ईडी द्वारा की जा रही है।
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