
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के विधायक पी रामकृष्ण रेड्डी को अंतरिम संरक्षण देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पी रामकृष्ण रेड्डी ने पलनाडु जिले में एक मतदान केंद्र में घुसकर ईवीएम तोड़ दिया था। यह घटना कैमरे में कैद हो गई थी।
रामकृष्ण रेड्डी के ईवीएम तोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के विधायक पी रामकृष्ण रेड्डी को अपने समर्थकों के साथ एक पोलिंग बूथ में घुसते दिखाया गया था। वह मतदान केंद्र में घुसे और ईवीएम व वीवीपीएटी को टेबल से उठाकर जमीन पर फेंककर तोड़ दिया।
हाईकोर्ट से विधायक को मिला था संरक्षण
यह घटना 13 मई की है। कुछ ही दिनों में रेड्डी को इस मामले तथा इससे संबंधित मामलों में संरक्षण मिल गया था। हाईकोर्ट के जज वेंकट ज्योतिर्मयी ने अंतरिम आदेश जारी कर पुलिस को निर्देश दिया था कि वह लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद बुधवार को सुबह 10 बजे तक विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई न करे।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और संदीप मेहता की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई की। खंडपीठ ने हाई कोर्ट के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। कहा कि हाईकोर्ट ने "सिस्टम का पूरा मजाक" बताया।
जस्टिस अरविंद कुमार ने घटना का वीडियो दिखाए जाने के बाद कहा, "ऐसे मामलों में अदालत अंतरिम संरक्षण कैसे दे सकती है। अगर हम इस आदेश पर रोक नहीं लगाते हैं तो यह व्यवस्था का मजाक उड़ाने के समान होगा। क्या हमारा मजाक उड़ाया जा रहा है? यह सरासर मजाक है। इतने सारे लोग मतदान केंद्र में कैसे प्रवेश कर सकते हैं?"
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह लाइव वेब प्रसारण था। शिकायतकर्ता ने कहा कि ईवीएम और वीवीपैट दोनों छीन लिए गए और नष्ट कर दिए गए। मतदान केंद्र के अंदर आठ लोग थे। जमानत का सवाल ही कहां है? पहली नजर में यह कोई छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो नहीं है।" सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को रेड्डी के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई करने का आदेश दिया है।
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