सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दुर्घटना में बच्चे के दिव्यांग होने पर अब मिलेगा इतना मुआवजा

Published : Sep 08, 2025, 12:42 PM IST
Supreme Court  Of india

सार

Compensation In Road Accident: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना में बच्चे की मौत या दिव्यांग होने पर मुआवजा कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर दिया जाएगा। दस्तावेज न होने पर बीमा कंपनी जिम्मेदार होगी।

Compensation In Road Accident: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बच्चा सड़क हादसे में दिव्यांग हो जाता है तो उसे सिर्फ इस वजह से कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता कि वह कमाने वाला नहीं था। इसी के साथ कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट का आदेश बदलते हुए मुआवजा 8.65 लाख रुपये से बढ़ाकर 35.90 लाख रुपये कर दिया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि नाबालिग की आय का आकलन कम से कम उस राज्य में तय कुशल मजदूर की न्यूनतम मज़दूरी के आधार पर होना चाहिए।

मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8 लाख 65 हजार रुपये किया

14 अक्टूबर 2012 को इंदौर में आठ साल का हितेश पटेल अपने पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक गाड़ी ने उसे अचानक से टक्कर मार दिया। इस हादसे में घायल हो गया जिसके कारण हितेश को गंभीर चोटें आईं और वह 30% दिव्यांग हो गया। इसलिए हितेश के परिवार ने 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने की मांग की। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह हितेश को 3 लाख 90 हजार रुपये का मुआवजा दे। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि हितेश सिर्फ आठ साल का है, मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8 लाख 65 हजार रुपये कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी नाबालिग को कमाई न करने वाला मानना गलत है, क्योंकि बच्चे का भविष्य तय नहीं होता। अदालत ने 2012 में गुजरात में कुशल मजदूर की न्यूनतम मज़दूरी 227.85 रुपये प्रतिदिन मानकर हितेश की मासिक आय 6,836 रुपये तय की। इसके बाद इसमें 40% भविष्य की संभावनाओं को जोड़कर और 90% स्थायी दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए कुल मुआवज़ा 35.90 लाख रुपये तय किया गया।

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दूसरे नुकसानों के लिए भी मिलेगा मुआवजा

कोर्ट ने कहा कि हितेश को दूसरे नुकसानों के लिए भी मुआवजा मिलेगा। उसे 5 लाख रुपये दर्द और परेशानी के लिए, 3 लाख रुपये शादी के मौके पर होने वाले नुकसान के लिए और 5 लाख रुपये कृत्रिम पैर के लिए दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी केस में आय का सही सबूत न हो तो बीमा कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि उस राज्य में न्यूनतम मज़दूरी कितनी है। यह नियम अब देश के सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों में लागू होगा।

 

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