
SC notice on Karnataka Muslims OBC reservation: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को मुस्लिम आरक्षण खत्म करने पर झटका दिया है। कोर्ट ने मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण कोटा खत्म करने पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को करेगा।
कर्नाटक सरकार के मुस्लिम ओबीसी आरक्षण खत्म किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई चल रही है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार ने मुसलमानों के लिए चार फीसदी आरक्षण को खत्म कर दो नई कैटेगरी की घोषणा की थी। इन चार प्रतिशत आरक्षण को दूसरे समुदाय में बांट दिया गया था।
24 मार्च को बोम्मई सरकार ने मुसलमानों का आरक्षण कर दिया था खत्म
24 मार्च 2023 को कर्नाटक सरकार की मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की कैबिनेट ने मुसलमानों के लिए ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया था। कर्नाटक में मुसलमानों को 4 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण दिया जाता था। लेकिन कैबिनेट ने निर्णय कर मुस्लिम समाज को आर्थिक आधार पर आरक्षण श्रेणी में रखा गया। दस प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटा में डाल दिया गया है। मुस्लिम समाज के चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को काटकर वोक्कालिगा और लिंगायत समाज को दे दिया गया। दो प्रतिशत वोक्कालिगा और दो प्रतिशत लिंगायत समाज को यह ओबीसी कोटा आवंटित कर दिया गया ईडब्ल्यूएस वाले कोटे में मुसलमानों के अलावा ब्राह्मणों, जैनियों, आर्य वैश्यों, नागरथों, मुदलियारों को रखा गया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि पॉजिटिव रूप में देखे तो मुसलमानों को दस प्रतिशत आरक्षण के बड़े पूल में रखा गया है।
लिंगायत और वोक्कालिगा का आरक्षण कोटा बढ़ा दिया था
कर्नाटक कैबिनेट के निर्णय के बाद ओबीसी रिजर्वेशन का वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों का कोटा बढ़ गया था। वोक्कालिगा को चार प्रतिशत तो लिंगायत को पांच प्रतिशत ओबीसी आरक्षण कोटा में निर्धारित था। लेकिन दो-दो प्रतिशत बढ़ने के बाद वोक्कालिगा समुदाय का कोटा छह प्रतिशत तो लिंगायत समुदाय को सात प्रतिशत हो गया। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के बाद वोक्कालिगा को क्रमशः 2 (सी) और 2 (डी) श्रेणी के तहत 6 प्रतिशत और लिंगायत को 7 प्रतिशत मिलेगा।
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