
नई दिल्ली. दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत सख्त नजर आई। जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। बेंच ने कहा कहा कि दिल्ली हर साल घुटती जा रही है, लेकिन हम कुछ नहीं कर पा रहे। ऐसा हर साल 10-15 दिनों के लिए होने लगा है। ऐसा किसी सभ्य देश में नहीं होता। जीने का हक सबसे जरूरी है।
प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी टिप्पणी
1- 'हम इस तरीके से जीवित नहीं रह सकते। इसे ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता, इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए।'
2- 'शहर में कोई भी जगह रहने के लिए सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि घर भी नहीं। यह अत्याचार है।'
3- 'शीर्ष अदालत ने कहा- हम इस प्रदूषण की वजह से अपने जीवन का बहुमूल्य वक्त गंवा रहे हैं।'
4- 'दिल्ली में प्रदूषण से स्थिति भयंकर है।'
5- 'क्या हम इस वातावरण में जी सकते हैं? हम इस तरह नहीं जी सकते।'
6- केंद्र और राज्य सरकार इससे निपटने के लिए क्या उपाए उठा रही है। प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारों के पास क्या उपाए हैं?
7- ये सब हर साल हमारे नाक के नीचे हो रहा है। लोगों को दिल्ली ना आने और छोड़ने की सलाह दी जा रही है। इसके लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं।
8- लोग राज्यों और पड़ोसी राज्यों में मर रह हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम हर चीज पर मजाक समझ रहे हैं।
9- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर साल ऐसे नहीं चल सकता।
10- सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पराली जलाने के मामले में पंजाब में 7% वृद्धि हुई, जबकि हरियाणा में 17% की कमी आई।
ऑड ईवन स्कीम पर भी उठाए सवाल
जस्टिस अरुण मिश्रा ने दिल्ली में आप सरकार के ऑड ईवन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कारों से कम प्रदूषण होता, दिल्ली को ऑड ईवन से क्या मिलने वाला? उन्होंने पूछा कि इसके पीछे क्या लॉजिक है। डीजल कारों पर बैन तो समझ आता है, लेकिन हम इस स्कीम के पीछे की वजह नहीं समझ पा रहे।
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