
Lok Sabha Election 2024: चुनावों में हमनाम उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध के अनुरोध की याचिका को खारिज कर दी गई है। याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राजनीतिक नेताओं के नाम वाला कोई व्यक्ति भी चुनाव मैदान में उतरता है तो उसे चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर राजनीतिक नेताओं के नाम पर नाम हैं तो वह लोगों को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता।
याचिकाकर्ता बोला-नामधारी उम्मीदवारों को होता है नुकसान
याचिका साबू स्टीफन ने दायर की थी। साबू स्टीफन ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि वोटर्स को गुमराह करने के लिए हाई प्रोफाइल सीटों पर नामधारी उम्मीदवारों को खड़ा किया जाता है। ऐसे उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण अक्सर नामधारी उम्मीदवारों को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ता है। याचिका में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के हित में इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे खारिज करने की बात कही। जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा कि अगर माता-पिता ने उम्मीदवारों को समान नाम दिए हैं तो उन्हें चुनाव लड़ने से कैसे रोका जा सकता है? इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।
कई बार दिग्गज नाम वालों के हमनाम कर देते हैं नुकसान
दरअसल, दिग्गज नाम वालों के हमनाम लोगों के चुनाव लड़ने का खामियाजा कई बार बड़े नेताओं को भुगतना पड़ता है। तमिलनाडु के रामनाथपुरम लोकसभा सीट पर पूर्व सीएम ओ पन्नीरसेल्वम चुनाव मैदान में हैं। ओपीएस के नाम से जाने जाने वाले, पन्नीरसेल्वम के अलावा चार अन्य पन्नीरसेल्वम उसी सीट पर चुनाव मैदान में हैं। ये हैं ओचप्पन पन्नीरसेल्वम, ओय्या थेवर पन्नीरसेल्वम, ओचा थेवर पन्नीरसेल्वम और ओय्याराम पन्नीरसेल्वम - ये सभी स्वतंत्र उम्मीदवार हैं। इसी तरह महाराष्ट्र की रायगढ़ सीट पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अनंत गीते को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला एनसीपी के सुनील तटकरे से है। लेकिन यहां दो और अनंत गीते चुनाव मैदान में निर्दलीय डटे हुए हैं।
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