
नई दिल्ली। दिल्ली के इंडिया गेट (India gate)पर रविवार को स्वर्णिम विजय पर्व का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा- ये आयोजन बहुत ही दिव्य और भव्य रूप में करने का निर्णय हुआ था, मगर देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य बहादुरों के निधन के बाद इसे सादगी के साथ मनाने का निर्णय लिया गया है। इस मौके पर उन्होंने बिपिन रावत के साथ ही हेलिकॉप्टर हादसे में मृत सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी।
स्वर्णिम विजय पर्व (Swarnim Vijay Parv) के उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने कहा-आज हम सभी इंडिया गेट पर 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध (India Pakistan War) के स्वर्णिम विजय वर्ष के अंतर्गत आयोजित विजय पर्व को मनाने के लिए इक्टठे हुए हैं। यह पर्व भारतीय सेनाओं (Indian Army) की उस शानदार जीत के उपलक्ष्य में है, जिसने दक्षिण एशिया के इतिहास और भूगोल दोनों को बदल कर रख दिया।
जनरल रावत की कमी महसूस हो रही
रक्षा मंत्री ने कहा- जनरल रावत के निधन से एक बहादुर सैनिक, सलाहकार और जिंदादिल इंसान को खोया है। उन्होंने बताया कि जनरल रावत इस विजय पर्व के आयोजन को लेकर बेहद उत्साहित थे। कई बार इस कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर उन्होंने मुझसे चर्चा की थी। इसलिए मुझे उनकी कमी काफी महसूस हो रही है।
ग्रुप कमांडर वरुण सिंह के परिजनों के संपर्क में हूं
राजनाथ ने बताया कि एयरफोर्स के ऑफिस ग्रुप कमांडर वरुण सिंह का इलाज चल रहा है। मैं लगातार संपर्क में हूं और उनके पिताजी से हमारा लगातार संपर्क बना हुआ है। हम सभी प्रार्थना करते हैं कि वो जल्द ही ठीक होकर आएं और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। गौरतलब है कि देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका समेत 13 लोगों की जान 8 दिसंबर को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में चली गई थी। इस हादसे में ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही जिंदा बच पाए थे, जिनका वेलिंगटन के मिलिट्री अस्पताल में इलाज चल रहा है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
पाकिस्तान के साथ जीत के 50 साल पूरे होने पर स्वर्णिम नर्व
स्वर्णिम विजय पर्व 1971 में हुई पाकिस्तान के साथ जंग में भारत की जीत के 50 साल पूरे होने पर मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 16 दिसंबर को स्वर्णिम विजय वर्ष मनाने की घोषणा की थी। 1971 में 3 दिसंबर को भारत और पाकिस्तान के बीच जंग शुरू हुई थी और मात्र 13 दिनों में 16 दिसंबर को भारत ने इस लड़ाई को जीत लिया था। इस युद्ध के बाद पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बना था। इस जंग में पाकिस्तानी सेना के 93 हजार से ज्यादा सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था।
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