
चेन्नई। रविवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ दिवाली (Diwali) का त्योहार मनाया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैन लगाने के बाद भी दिल्ली में लोगों ने पटाखे चलाए और हवा को जहरीला बना दिया। वहीं, तमिलनाडु के सात गांव के लोगों ने दिवाली पर पटाखा नहीं जलाया। इन्हें रोकने के लिए न तो सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगाया था और न कोई कानून है। इसके बाद भी एक अनोखी वजह से लोगों ने खुद ही यह फैसला लिया। यह वजह है जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम।
पटाखे जलाकर इंसान जश्न मनाते हैं, लेकिन यह जानवरों को परेशान करता है। रात के वक्त अधिकतर जानवर और पक्षी सोते हैं। ऐसे में पटाखे की तेज आवाज व रोशनी से उन्हें और अधिक परेशानी होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के इरोड जिले के सात गांवों ने बिना पटाखे फोड़े दिवाली मनाई। ये गांव इरोड से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर वदामुगम वेल्लोड के करीब हैं। यहां पक्षी अभयारण्य है। पक्षियों की आबादी की रक्षा के लिए गांव के लोगों ने मिलकर यह फैसला लिया था।
प्रजनन के मौसम में हजारों पक्षी आते हैं
अक्टूबर से जनवरी तक प्रजनन के मौसम के दौरान यहां हजारों स्थानीय और प्रवासी पक्षी आते हैं। यह उनके लिए किसी स्वर्ग जैसा है। वे यहां बिना किसी डर के अंडे देने और सेने के लिए आते हैं। प्रजनन के मौसम में दिवाली का पर्व पड़ता है। इसके चलते पक्षी अभयारण्य के आसपास के गांव के लोग शांति से दिवाली मनाते हैं। अभयारण्य के आसपास के सात गांव में 900 से अधिक परिवार रहते हैं।
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22 साल से शांत दिवाली मना रहे लोग
22 साल से सात गांव के लोग इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। वे आतिशबाजी के बजाय अपने बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदते हैं। सेलप्पमपालयम, वदामुगम वेल्लोड, सेम्मांडमपालयम, करुक्कनकट्टू वलासु, पुंगमपाडी और दो अन्य गांवों ने इस परंपरा को जारी रखा है। शांति से दिवाली मनाने के चलते पक्षी परेशान नहीं होते। उन्हें अपने प्राकृतिक आवास में पनपने का मौका मिलता है।
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