
चेन्नई(Chennai).तमिलनाडु के तंजावुर जिले के एक मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा लावण्या के जहर खाने से हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बेशक इस मामले को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बैंच ने CBI को ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन सरकार की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच तमिलनाडु भाजपा ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी तमिलनाडु सरकार को नसीहत
इस मामले में धर्मांतरण' के आरोप लगे हैं। राज्य सरकार ने CBI जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जांच रोकने से इनकार कर दिया। वहीं, तमिलनाडु पुलिस को आदेश दिया कि वो अपनी तरफ से जुटाए सबूत CBI को सौंपे। साथ ही सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले में बहुत कुछ जांच होनी है, इसलिए वो इसे अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और CBI को नोटिस जारी करके तीन हफ्ते में समय मांगा है।
तमिलनाडु भाजपा ने पूछा सवाल
तमिलनाडु भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष के अन्नामलाई(K.Annamalai) ने tweet करके सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं। अन्नमलाई कहा कि एक बार फिर साबित हुआ है, क्या द्रमुक सरकार अपने गढ़े हुए झूठ के लिए हम सभी से माफी मागेंगी? क्या अब कम से कम CM(एमके स्टालिन) लावण्या के माता-पिता से मिलेंगे?
वॉर्डन पर हैं गंभीर आरोप
मरने से पहले छात्रा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि हॉस्टल में उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जा रही थी। छात्रा ने 9 जनवरी को जहर खा लिया था। उसकी 19 जनवरी को मौत हो गई थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि यह धर्म परिवर्तन का मामला है। पार्टी ने सीबीआई जांच की भी मांग की थी। इतना ही नहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी आत्महत्या की जांच के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया था। मद्रास हाईकोर्ट ने इससे पहले 24 जनवरी को मौत से पहले पीड़िता का वीडियो बनाने वाले को पुलिस अधिकारियों के सामने पेश होने का आदेश दिया था।
मृत्यु से पहले दिए बयान में छात्रा ने लगाए थे धर्म परिवर्तन के आरोप
छात्रा ने जब हॉस्टल में कीटनाशक खा लिया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मृत्यु से पहले उसका बयान दर्ज किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने छात्रा ने अपने बयान में सीधा और स्पष्ट आरोप लगाया कि छात्रावास वार्डन ने उस पर गैर शैक्षणिक कामों का बोझ डाला, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या का रास्ता चुना। हाईकोर्ट ने इस मामले में राय दी कि यह जांच सही रास्ते पर आगे नहीं बढ़ रही थी, क्योंकि सरकार के एक मंत्री स्कूल के पक्ष में बात कर रहे हैं। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है। इसके बाद यह मामला CBI को सौंप दिया गया था।
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