तीस्ता सीतलवाड को मिली अंतरिम जमानत: सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच ने रात में की सुनवाई

Published : Jul 01, 2023, 07:30 PM ISTUpdated : Jul 01, 2023, 10:58 PM IST
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सार

गुजरात दंगों से जुड़े एक केस में तीस्ता सीतलवाड की जमानत याचिका पर सुनवाई शनिवार की रात में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने की।

Teesta Setalvad bail: गुजरात दंगों से जुड़े एक केस में तीस्ता सीतलवाड की जमानत याचिका पर सुनवाई शनिवार रात में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने की। तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत मिल गई है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के दो जजों जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पीके मिश्रा के बीच मतभेद हो गया था। फिर इस केस को CJI को भेज दिया गया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने केस को सुनने के लिए तीन जजों की बेंच बनाई। शनिवार रात सवा नौ बजे बेंच इस मामले में सुनवाई शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों जस्टिस बीआर गवई (Justice BR Gavai), जस्टिस एएस बोपन्ना (Justice AS Bopanna), जस्टिस दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) की बेंच इस मामले की सुनवाई करते हुए सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने तीस्ता को सात दिनों की अंतरिम जमानत मंजूर की है।

गुजरात दंगों से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर का आदेश दिया था। शनिवार को तीस्ता की ओर से दाखिल जमानत याचिक पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अब सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच के पास मामला भेजा गया है। हालांकि, तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए नहीं हो रही क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल सितंबर में अंतरिम जमानत दी थी।

तीस्ता सीतलवाड़ को क्यों जमानत की जरूरत?

तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को कथित तौर पर सबूत गढ़ने, जालसाजी करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीतलवाड़ को गुजरात के साबरमति जेल में रखा गया था। पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत दिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर आईं थी।

तीस्ता सीतलवाड़ पर 2002 में गुजरात में हुए दंगे के मामले में झूठे सबूत और फर्जी गवाह का इस्तेमाल कर निर्दोष लोगों को फंसाने का आरोप है। इस संबंध संबंध में गुजरात एटीएस ने FIR दर्ज किया था। FIR में आरोप लगाया गया है कि गवाहों के झूठे बयान तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा तैयार किए गए थे और दंगों की जांच के लिए गठित नानावती आयोग के समक्ष दायर किए गए थे। आरोप है कि तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने झूठे सबूत गढ़कर और निर्दोष लोगों के खिलाफ झूठी और दुर्भावनापूर्ण आपराधिक कार्यवाही शुरू करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की साजिश रची थी।

एसआईटी ने कहा पीएम मोदी को फंसाने की भी रची साजिश

गुजरात दंगों में पीएम नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए सबूतों को गढ़ने के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात सरकार को बदनाम करने की साजिश रची। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 2002 के गोधरा दंगों के संबंध में मौत की सजा दिलाने की साजिश की।

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