
मुंबई. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। मौजूदा सत्ता में काबिज भाजपा-शिवसेना के गठबंधन ने बहुमत भी हासिल कर लिया है, मगर अभी तक राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। शिवसेना नई सरकार में 50:50 की हिस्सेदारी चाहती है और ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद मांग रही है। पार्टी ने साफ किया है कि लिखित आश्वासन के बगैर बीजेपी को समर्थन नहीं दिया जाएगा।
इस बीच शिवसेना के पक्ष में माहौल भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस, एनसीपी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने पहले ही सेना की सरकार को "समर्थन" देने की बात कही है। अब उद्धव ठाकरे की पार्टी को महाराष्ट्र में चार और विधायकों के समर्थन मिलने की खबरें आ रही हैं। इन चार विधायकों का सपोर्ट मिलने के बाद विधानसभा में पार्टी के समर्थक विधायकों की संख्या 60 तक पहुंच गई है।
मोलभाव की ताकत में इजाफा
प्रहार जनशक्ति पार्टी ने शिवसेना को समर्थन दिया है। पार्टी के बच्चू काडु राजकुमार पटेल ने मातोश्री जाकर ठाकरे से मुलाक़ात की और जनशक्ति के दो विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा। इस दौरान शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे। दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलने की बात भी सामने आ रही है।
मानने को तैयार नहीं है शिवसेना
शिवसेना नई सरकार में बराबरी के हक से कम पर राजी नहीं है। पहचान गुप्त रखने की शर्त पर शिवसेना के एक नेता ने बताया, "काडु के समर्थन से शिवसेना के मोल-भाव की ताकत बढ़ गई है। हमने 2014-19 में भाजपा के साथ समझौता किया था, अब अपना हक पाने का वक्त आ गया है।"
फडणवीस का दावा देंगे स्थिर सरकार
उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जोर देकर कहा कि भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है और “भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन” प्रदेश में स्थिर सरकार देगा। दिवाली के मौके पर एकजुट पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बनाने की प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू होगी।
उन्होंने कहा, “जनादेश में भाजपा, शिवसेना (और अन्य सहयोगियों) आरपीआई, आरएसपी और शिव संग्राम को स्पष्ट बहुमत मिला है। इस जनादेश का सम्मान किया जाएगा इसमें किसी को शंका नहीं होनी चाहिए।”
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