
Republic Day 2024: जीवन का जज्बा एक सैनिक के लिए किसी भी सूरत में कम नहीं होता। लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश इसका जीता जागता उदाहरण हैं। कई साल पहले एक बार्डर ऑपरेशन के दौरान अपनी आंखों की रोशनी खो चुके द्वारकेश आज की तारीख में हजारों लोगों के प्रेरणास्रोत हैं। ले.कर्नल द्वारकेश टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर जीवन को आसान बनाने के साथ दूसरों को प्रेरित भी कर रहे हैं। ले.कर्नल द्वारकेश कहते हैं: मैं एक सैनिक हूं, मैं हमेशा एक सैनिक रहूंगा, जब तक आप एक को स्वीकार नहीं करते तब तक कोई हार नहीं होती।
एआई के मास्टर हैं लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश
दैनिक कार्यों पर विजय पाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश अपनी दक्षता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के उपयोग में महारत हासिल कर चुके हैं। मध्य प्रदेश में भारतीय सेना पैरालंपिक नोड में प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने प्रौद्योगिकी को अपनी दिनचर्या में इंटीग्रेट कर लिया है। वह अपनी कमजोरियों को ताकत बना चुके हैं और जीवन की दुश्वारियों को टेक्नोलॉजी के जरिए आसान करने की सीख दे रहे हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में विशेष रूप से थे आमंत्रित
लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के लिए विशेष अतिथियों में से एक के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में देश की सैन्य ताकत और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाया गया।
क्या कहते हैं कर्नल द्वारकेश?
35 वर्षीय अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश ने जोर देकर कहा: मैंने अपनी दृष्टि खो दी है, जीवन के प्रति अपना नजरिया नहीं। एशियानेट के साथ एक विशेष साक्षात्कार में लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश ने अपने जीवन, दृढ़ संकल्प, बहादुरी और समर्पण के बारे में बातें साझा की।
लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश की कहानी उन व्यक्तियों की अदम्य भावना के प्रमाण के रूप में काम करती है जो विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठते हैं, साहस और दृढ़ता के मूल्यों को अपनाते हैं।
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