
एशियानेट डेस्क. आज धनतेरस है, समृद्धि और धन के लिए शुभ दिन। धनतेरस भारत में एक बहुत ही लोकप्रिय त्योहार है और दिवाली से ठीक 2 दिन पहले मनाया जाता है। बहुत से लोग इस तथ्य से अवगत ही नहीं हैं कि धनतेरस को धनत्रयोदशी या छोटी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। धनतेरस पर सोना खरीदने वाले व्यवसायियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। लोग आमतौर पर धनतेरस पर सोने की छड़ों या गहनों में निवेश करते हैं।
इस शुभ दिन पर दिवाली के लिए नए कपड़े भी खरीदे जाते हैं। यह भी माना जाता है कि धनतेरस पर नई धातु खरीदना सौभाग्य लाता है। लेकिन लोग धनतेरस पर सोना और बर्तन क्यों खरीदते हैं? क्या महत्व है। वैसे तो धनतेरस की कईं कहानियां हैं लेकिन एक पौराणिक कथा सबसे लोकप्रिय है और धनतेरस के महत्व को बताती है, जिसका अर्थ है धन और समृद्धि।
तो आइए जानते हैं कि वो कौनसी कथा है।
धनतेरस के जश्न के पीछे कई किंवदंतियां हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक हेमा नाम का राजा था। एक व्यक्ति ने राजा हेमा के बेटे को सांप के काटने से उसकी शादी के चौथे दिन मरने की भविष्यवाणीं की थी। जब उसकी पत्नी को भविष्यवाणी का पता चला, तो उसने शादी के चौथे दिन उसे सोने नहीं दिया और उसके सारे गहने और सोने के सिक्के दरवाजे के सामने रख दिए और गाने गाए। जब मृत्यु के देवता भगवान यम एक सर्प के रूप में उनके घर पहुँचे, तो वे आभूषणों की चकाचौंध से इतने अन्धे हो गए थे कि वे दरवाजे से नहीं उतरे। वह सर्प गहनों के ढेर पर बैठ गया और पूरी रात गाने सुनता रहा। सुबह वह चुपचाप चला गया।
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