
नई दिल्ली। मुस्लिम समाज की महिलाओं को तीन तलाक से तो मुक्ति मिल गई, लेकिन कई ऐसे और भी अजीब रिवाज हैं, जिससे महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। एक ऐसा ही रिवाज है मुताह निकाह। इसमें तय समय की शादी के लिए पुरुष महिला को पैसे देते है। विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने सोमवार को हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुताह निकाह का जिक्र करते हुए हैदराबाद को अय्याश शेखों का ऐशगाह तक बता दिया।
मुताह निकाह एक प्रकार का कॉन्ट्रैक्ट निकाह है। इसमें पति पत्नी को निकाह के बदले पैसे देता है। पहले ही तय हो जाता है कि निकाह कितने समय के लिए है। इसे मजे के लिए किया गया निकाह भी कहा जाता है। निकाह के बाद पति पत्नी एक साथ रहते हैं। जब कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार समय खत्म हो जाता है तो दोनों अलग हो जाते हैं। अलग होने पर महिला अपने गुजारा भत्ते की मांग नहीं कर सकती। पुरुष कॉन्ट्रैक्ट का समय खत्म होने के बाद आजाद होता है।
निकाह के लिए पैसे देता है पुरुष
मुताह निकाह के लिए पुरुष पैसे देता है। इसलिए इसे महिला की खरीद भी कहा जाता है। इसे वेश्यावृत्ति का एक रूप भी कहा गया है, जिसमें पुरुष महिला को तय वक्त तक पत्नी के रूप में रखने के लिए पैसे देता। हैदराबाद के मौलिम मोहिसिन बिन हुसैन ने मुताह निकाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है।
बॉन्ड भरकर होती है शादी
मुताह निकाह में बॉन्ड भरकर तय समय के लिए शादी की जाती है। समय पूरा होने पर पति पत्नी का रिश्ता उसी तारीख के हिसाब से खत्म हो जाता है। मुताह निकाह छह महीने, एक साल या पांच साल जो समय दोनों पक्ष को मंजूर हो उतने समय के लिए होता है। शिया मुसलमान मुताह निकाह करते हैं। वहीं, सु्न्नी मुसलमानों में इस तरह के निकाह को मिस्यार निकाह कहते हैं।
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बच्चों का नहीं होता भविष्य
मुताह निकाह की अवधि खत्म होने के बाद महिला का पति की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं रहता। वह पति से हिस्सा या जीवनयापन के लिए पैसे नहीं मांग सकती। इस तरह के निकाह से हुए बच्चे का कोई भविष्य नहीं होता। पिता उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए मजबूर नहीं होता।
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