
तिरुपति. तिरुपति मंदिर भारत का प्रसिद्ध और धनी मंदिर है. कुछ महीने पहले, तिरुपति के प्रसाद लड्डू में बीफ और मछली के तेल के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था, जिससे हंगामा मच गया था. मंदिर की पवित्रता को लेकर सवाल उठे थे और गैर-हिंदू सरकार व प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया था. इस विवाद के बाद, हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदुओं को नौकरी न देने की मांग उठी. अब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है. मंदिर के गैर-हिंदू कर्मचारियों और प्रशासनिक सदस्यों को गेट पास देने का आदेश दिया गया है. सरकार को इस बारे में सूचित किया गया है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है.
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) एक स्वतंत्र समिति है. इस समिति ने यह आदेश दिया है. TTD अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने यह आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिर में गैर-हिंदुओं को जगह देना सही नहीं है. जिनका हिंदू देवताओं में विश्वास नहीं है, वे मंदिर में श्रद्धा से काम नहीं कर सकते. TTD के इस फैसले से मंदिर के 7,000 स्थायी कर्मचारियों में से 300 गैर-हिंदू कर्मचारी प्रभावित होंगे.
तिरुपति मंदिर में 300 स्थायी और 14,000 संविदा कर्मचारी हैं, जिनमें से कई गैर-हिंदू हैं. 300 स्थायी गैर-हिंदू कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने या आंध्र प्रदेश सरकार के किसी अन्य विभाग में स्थानांतरित होने का आदेश दिया गया है.
TTD ने सवाल उठाया है कि गैर-हिंदू सदस्य मंदिर की पवित्रता कैसे बनाए रखेंगे? मंदिर आस्था और भक्ति पर आधारित है. ऐसे में जिनका हिंदू देवताओं में विश्वास और सम्मान नहीं है, वे कैसे पवित्रता और सम्मान से काम कर सकते हैं?
नई चंद्रबाबू नायडू सरकार ने सत्ता में आने के बाद कई बदलाव किए हैं. गैर-हिंदुओं को मंदिर प्रशासन में सदस्यता या नौकरी नहीं मिलेगी. तिरुपति मंदिर की पवित्रता बनाए रखने का वादा किया गया है. लड्डू विवाद ने इस मुद्दे को और हवा दी थी. यह घटना आंध्र प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी. पूर्व वाईएसआर जगनमोहन रेड्डी सरकार पर लड्डू में बीफ और मछली का तेल इस्तेमाल करने का आरोप लगा था. कम लागत में लड्डू बनाने और मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने का आरोप लगाया गया था. देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. बाद में उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व में मंदिर की सफाई की गई थी.
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