इतिहास की किताब पढ़कर 12वीं सदी का मंदिर देखने पहुंचा पुरातत्व प्रेमी, गेट पर नजर पड़ते ही होश उड़ गए

Published : Aug 16, 2022, 02:35 PM IST
इतिहास की किताब पढ़कर 12वीं सदी का मंदिर देखने पहुंचा पुरातत्व प्रेमी, गेट पर नजर पड़ते ही होश उड़ गए

सार

तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले के नेवनई गांव में 12वीं सदी का सोरनाकदेश्वर मंदिर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां स्थित दो प्राचीन मूर्तियां गायब हैं। हैरानी की बात यह है कि गांववालों के मुताबिक, उन्होंने 20 साल से ये मूर्तियां नहीं देखीं।   

चेन्नई. तमिलनाडु की आइडल विंग पुलिस(Tamil Nadu Idol wing police) ने 12वीं सदी की दो चोल राजाओं की गुमशुदा मूर्तियों की जांच शुरू कर दी है। एक पुरातत्व उत्साही के. सेनगुट्टुवन(archeological enthusiast, K. Senguttuvan) ने शिकायत की थी कि कल्लाकुरिची जिले के नेवनई गांव में सोरनाकदेश्वर मंदिर में स्थित मूर्तियां गायब हैं।

इतिहास की किताब पढ़कर मंदिर देखने पहुंचे थे सेनगुट्टुवन
अपनी शिकायत में सेनगुट्टुवन ने कहा कि जब वह इस क्षेत्र के दौरे पर मंदिर गए थे, तब उन्होंने मूर्तियों को गायब पाया। उलुंदुरपेट पुलिस ने मामला दर्ज किया और फिर उसे आइडल विंग पुलिस को ट्रांसफर कर दिया है। सेनगुट्टुवन ने शिकायत में कहा कि सोर्णकदेश्वर एक प्राचीन मंदिर था और चोल राजाओं ने मंदिर को बहुत बड़ा दान दिया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब वह इस पर इतिहास पढ़ने के बाद मंदिर के दौरे पर गए थे, तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि मंदिर के मुख्य द्वार के सामने खड़ी चोल राजाओं की दो मूर्तियां गायब हो गई थीं। शिकायत में पुरातत्वविद् ने यह भी कहा कि जब उन्होंने स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि मूर्तियां पिछले 20 वर्षों से गायब हैं।

फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पुडुचेरी में रिकॉर्ड है
फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पुडुचेरी ने इन दो मूर्तियों की तस्वीरों को संरक्षित किया था। फ्रांसीसी संस्थान के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, यह तस्वीर 10 सितंबर, 1967 को ली गई थी। सेनगुट्टुवन के अनुसार, यह मंदिर की इन मूर्तियों का एकमात्र महत्वपूर्ण सबूत है।  यानी इससे ही पता चलता है कि इस मंदिर के दरवाजे पर कभी ये दो मूर्तियां हुआ करती थीं, जो गायब हैं। उलुंदुरपेट पुलिस SHO ने बताया कि आईपीसी की धारा 379, 25 (1) और एंटिक्स एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट 1972 के तहत FIR दर्ज की गई है। एसएचओ ने कहा कि मूर्ति विंग पुलिस मामले की जांच कर रही है। सेनगुट्टुवन ने कहा, "कुछ बदमाश जो इन मूर्तियों के पुरातात्विक मूल्य को नहीं जानते हैं, वे उन्हें चुराकर विदेशों में भारी कीमत पर बेच देते हैं। राज्य पुरातत्व विभाग को तमिल ऐतिहासिक पुस्तकों में वर्णित कलाकृतियों की सूची तैयार करने और उनकी रक्षा करने के लिए पहल करनी चाहिए।

जानिए चोल राजवंश क्या था?
चोल प्राचीन भारत का एक राजवंश(Chola dynasty) था। दक्षिण भारत में और पास के अन्य देशों में तमिल चोल शासकों ने 9वीं शताब्दी से 13 वीं शताब्दी के बीच एक बहुत ही शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य स्थापित किया था। 'चोल' शब्द का जन्म को लेकर कई कहानियां हैं। कर्नल जेरिनो ने चोल शब्द को संस्कृत "काल" एवं "कोल" से संबद्ध करते हुए इसे दक्षिण भारत के कृष्णवर्ण आर्य समुदाय का सिंबल माना है। चोल शब्द को संस्कृत "चोर" तथा तमिल "चोलम्" से भी रिलेटेड किया गया है। संगमयुगीन मणिमेक्लै में चोलों को सूर्यवंशी कहा गया है। 12वीं सदी के अनेक स्थानीय राजवंश अपने को करिकाल से उद्भत कश्यप गोत्रीय बताते हैं।

यह भी पढ़ें
जानिए पाकिस्तान में कैसी है मंदिरों की हालत, किन शहरों में अब भी मनाई जाती है श्रीकृष्णा जन्माष्टमी
इमरान खान तो बड़े 'फेंकू' निकले, गोलमेज सम्मेलन-1930 की ये तस्वीर शेयर करके मारीं ये डींगें

 

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

मकर संक्रांति: कहीं गर्दन की हड्डी रेती तो कहीं काटी नस, चाइनीज मांझे की बेरहमी से कांप उठेगा कलेजा
Ariha Shah Case: साढ़े 4 साल से Germany में फंसी मासूम, मौसी ने बताया क्या है पूरा मामला