
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके लिए महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वेश्यावृत्ति से जोड़कर इनपुट मांगा गया है। विभिन्न महिला अधिकार और यौनकर्मी संगठनों से जुड़े 3,600 से अधिक लोगों ने इसका विरोध किया है।
जून 2024 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 56वें सत्र में महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर रिपोर्ट पेश किया जाएगा। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर वेश्यावृत्ति और महिलाओं व लड़कियों के खिलाफ हिंसा के बीच संबंध की जांच की जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक ने मांगा इनपुट
संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक ने सभी सदस्य देशों से रिपोर्ट को लेकर इनपुट मांगा है। इसमें वेश्यावृत्ति और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बीच संबंधों को बताने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही पूछा गया है कि इसे रोकने के लिए कौन से नियम बनाए गए हैं और क्या कदम उठाए गए हैं? सेक्स वर्कर्स को संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दावली पर आपत्ति है। उनका कहा है कि सेक्स वर्क को हिंसा से जोड़ना ठीक नहीं है। यह भी एक काम है।
यौनकर्मियों के अधिकारों को नकारने की हो रही कोशिश
इसको लेकर महिला अधिकार और यौनकर्मी संगठनों से जुड़े 3640 लोगों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त और संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत सहित अन्य के सामने याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि विशेष प्रतिवेदक ने 'सेक्स वर्कर' शब्द को "वेश्यावृत्ति का शिकार हुई महिलाओं" जैसा अपमानजनक माना है। यह महिलाओं के अपने भाग्य और आजीविका के नियंत्रण में नहीं होने के विचार का प्रतीक है।
SWASA (Sex Workers and Allies South Asia) की ओर याचिका लगाने में सलाह देने वाली वकील वृंदा ग्रोवर और आरती पई ने कहा कि यह यौनकर्मियों के अधिकारों को नकारने की कोशिश है। दशकों से सेक्स वर्कर्स अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वेश्यावृत्ति से जोड़ना यौनकर्मियों के अधिकारों को नकारने वाले ढांचे का समर्थन करना है।
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