अब तक जिंदा हैं निर्भया के बलात्कारी, यह दिल्ली सरकार की लापरवाही...केंद्रीय मंत्री ने लगाए ऐसे आरोप

Published : Jan 16, 2020, 01:53 PM ISTUpdated : Feb 02, 2022, 10:08 AM IST
अब तक जिंदा हैं निर्भया के बलात्कारी, यह दिल्ली सरकार की लापरवाही...केंद्रीय मंत्री ने लगाए ऐसे आरोप

सार

निर्भया केस में दोषियों को फांसी होने पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, अगर दिल्ली सरकार ने दोषियों को वक्त पर नोटिस दिया होता तो उनके अपील के सारे अधिकार अब तक खत्म होकर कहीं पहले ही उन्हें फांसी हो गई होती।  

नई दिल्ली. निर्भया केस में दोषियों को फांसी होने पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, अगर दिल्ली सरकार ने दोषियों को वक्त पर नोटिस दिया होता तो उनके अपील के सारे अधिकार अब तक खत्म होकर कहीं पहले ही उन्हें फांसी हो गई होती। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उन्हें वक्त पर नोटिस के क्यों नहीं दिया गया। बता दें कि निर्भया के दोषियों को पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी देने की समय तय किया है। इस बीच एक दोषी मुकेश ने दया याचिका लगाई है। मुकेश ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कहा है कि जब तक दया याचिका राष्ट्रपति के पास है, तब तक डेथ वॉरंट पर रोक लगा दी जाए।

मनीष सिसोदिया ने किया पलटवार

प्रकाश जावड़ेकर के बयान पर मनीष सिसोदिया ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, उनको और कोई मुद्दा नहीं मिल रहा इसलिए वो कुछ भी बोल रहे हैं।आम आदमी पार्टी सरकार निर्भया के दोषियों को फांसी दिलवाने के लिए कटिबद्ध है। इसमें दिल्ली सरकार का जो भी रोल होगा वो स्पीड पर होगा। कहीं कोई देरी नहीं होगी। 

दया याचिका खारिज होने के बाद भी 14 दिन का वक्त
दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार की तरफ से वकील ने दलील दी थी कि अगर मुकेश की दया याचिका को राष्ट्रपति खारिज करते हैं, उसके बाद भी दोषियों को 14 दिन का वक्त दिया जाता है। ऐसे में 22 जनवरी को फांसी देना कैसे संभव हो सकता है।  

3 दोषियों ने नहीं लगाई है दया याचिका
निर्भया के चार दोषियों में से दो की क्यूरेटिव पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें से एक ने दया याचिका लगाई है। बाकी दो के पास क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दोनों का विकल्प बचा हुआ है। 

क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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