
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण सभी प्लेटफार्मों के लिए खुलेपन, सुरक्षा, विश्वास और जवाबदेही के सिद्धांतों से बना है। Zoho के CEO श्रीधर वेम्बु द्वारा AI (Artificial Intelligence) को लेकर किए गए सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने यह बयान दिया।
अपने ट्वीट में राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि अगला डिजिटल इंडिया एक्ट इसे स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कानून होगा। श्रीधर वेम्बु ने AI जैसे उभरते तकनीकी और प्लेटफार्मों के टोलगेटिंग या एकाधिकार के जोखिमों की ओर इशारा किया है। हम उनकी बातों से सहमत हैं।
AI से सभी काम होंगे को इंसान को जॉब कहां से मिलेगा
श्रीधर वेम्बु ने AI को लेकर अपनी चिंताएं जताते हुए पांच ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर एआई को सभी नौकरियों को खत्म करना है तो इसका मतलब है कि एआई इंसान की मेहनत के बिना सभी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने में सक्षम होगा, जिनकी लोगों को जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हम हवा में मुफ्त में सांस लेते हैं। इसके लिए कोई फीस नहीं देते। अगर भविष्य में कोई जादुई AI बिना इंसान की मेहनत के सभी तरह के गुड्स और सर्विस का उत्पादन करता है तो यह हमारे लिए बुरा नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि हम AI द्वारा पैदा किए गए वस्तुओं के लिए भुगतान कैसे करेंगे, क्योंकि तब न कोई जॉब होगा और न आमदनी।
एआई पर किसी का एकाधिकार न हो
श्रीधर वेम्बु ने कहा कि सवाल यह है कि उस जादुई AI का मालिक कौन होगा? क्या इसपर किसी का एकाधिकार होगा। भारत के लोगों को मुफ्त डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती है क्योंकि UPI कॉमन डिजिटल गुड्स है। यह समानता एआई पर अच्छी तरह से लागू होता है। सरकारी नीति को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई पर किसी का एकाधिकार न हो।
वेम्बु ने कहा, "अगर AI सभी काम करेगा तो इंसान के लिए जॉब कहां से आएंगे। ऐसी दुनिया जिसमें AI मुफ्त में गुड्स और सर्विस पैदा करे तो सवाल उठता है कि इंसान क्या करेंगे? मैं एक आशावादी हूं। हमारे पास दोस्तों, परिवार, खेल, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक खोज जैसे काम के लिए अधिक समय होगा।
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उन्होंने पूछा कि हमारे नीति निर्माताओं को क्या करना चाहिए? मेरी सलाह है कि एआई तकनीक पर सख्त खुलेपन की नीति को रखा जाए। AI सुविधा देने वाली कुछ कंपनियां भारत छोड़ने की धमकी देंगे, लेकिन हमें उनके झांसे में नहीं आना चाहिए। हमारे कानूनों के अधीन भारतीय भी महान एआई का उत्पादन कर सकते हैं। इस क्षेत्र में कोई एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
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