
India reaction to US remark on CAA: सीएए लागू होने पर अमेरिका की भारत पर की गई टिप्पणी पर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने कड़ी आपत्ति जताई है। सरकार ने अमेरिकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत सूचना है। यह अनुचित है। नई दिल्ली के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। दरअसल, भारत में सीएए लागू होने के बाद अमेरिका ने यह कहा था कि वह बारीकी से निगरानी करेगा।
यह नागरिकता देने वाला कानून: विदेश मंत्रालय
अमेरिकी टिप्पणी के बाद विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम, नागरिकों के बारे में है। यह नागरिकता छीनने वाला कानून नहीं है बल्कि यह नागरिकता देने वाला कानून है। यह राज्यविहीनता के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है। प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक सीएए के कार्यान्वयन पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान का संबंध है, हमारा मानना है कि यह गलत जानकारी वाला और अनुचित है।
भारत के शुभचिंतकों और साझेदारों को स्वागत करना चाहिए
सरकार ने कहा कि जिन लोगों को भारत की बहुलवादी परंपराओं और क्षेत्र के विभाजन के बाद के इतिहास की सीमित समझ है, उनके व्याख्यान देने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। भारत के साझेदारों और शुभचिंतकों को इस कदम के इरादे का स्वागत करना चाहिए।
क्या कहा था अमेरिका ने सीएए को लेकर?
शुक्रवार को अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से एक सवाल किया गया कि क्या अमेरिकी सरकार चिंतित है कि सीएए भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। मिलर ने जवाब दिया कि हम चिंतित हैं। हम इस कानून की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। यह देख रहे हैं कि इसे कैसे लागू किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव के पहले लागू किया गया सीएए
देश में आम चुनाव होने से कुछ दिन पहले सीएए को सोमवार को नोटिफाई करके लागू कर दिया गया। दरअसल, सीएए को 2019 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास कराया गया था। लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। सीएए, देश के तीन पड़ोसी देशों के गैर मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान करने के लिए है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, पारसी, बौद्ध समुदाय के अल्पसंख्यक लोग भारत में नागरिकता लेने के हकदार हो जाएंगे। हालांकि, आलोचकों ने सीएए के दायरे में मुस्लिमों को नहीं रखने पर सवाल उठाया है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मुस्लिम नागरिकता के लिए देश में मौजूदा कानूनों के तहत आवेदन कर सकते हैं जिस पर सरकार अपना निर्णय ले सकती है।
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