
Vice President Election 2025: विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से है। हालांकि आंकड़े सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के पक्ष में हैं। एनडीए में फूट के बिना विपक्षी उम्मीदवार को जीत नहीं मिलेगी। उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर को होना है। मतदान संसद भवन में होगा।
INDIA ब्लॉक के पास वर्तमान में लगभग 300 सांसद हैं। इनमें कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राकांपा (शरदचंद्र पवार), माकपा, राजद, झामुमो, आप और आईयूएमएल शामिल हैं। इसके बाद भी सुदर्शन रेड्डी के पास जीत के लिए जरूरी वोटों की संख्या नहीं है।
एनडीए के 422 सांसदों (लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129) के साथ, सीपी राधाकृष्णन की जीत आसान दिख रही है। विपक्ष जगन मोहन रेड्डी की YSRCP (दोनों सदनों में 12 सांसद) और नवीन पटनायक की बीजेडी (7 राज्यसभा सांसद) को लुभाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन उनका समर्थन भी जीत नहीं दिला पाएगा।
उपराष्ट्रपति चुनाव गुप्त तरीके से होता है। हर सांसद को अपनी मर्जी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार है। इसके लिए उन्हें विवश नहीं कर सकते। व्हिप जारी नहीं किया जाता। ऐसे में विपक्ष के उम्मीदवार को जीत तभी मिल सकती है जब सत्ता पक्ष के सांसद उनके पक्ष में मतदान करें या वोट न डालें।
उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य (मनोनीत सदस्य भी) शामिल होते हैं। 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में खाली सीटों को छोड़कर निर्वाचक मंडल में 782 सांसद होंगे। इनमें से लोकसभा के 543 सांसद और राज्यसभा के 233 निर्वाचित व 12 मनोनीत सांसद होंगे। प्रत्येक सदस्य के मत का समान मूल्य होता है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सांसद गुप्त मतदान करते हैं। वे एक वोट डाल सकते हैं। सांसद क्रमानुसार उम्मीदवारों के बीच अपनी प्राथमिकताएं बताते हैं। सांसद उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1, 2, 3, आदि) में स्थान देता है। जैसे अगर किसी सांसद को सी.पी. राधाकृष्णन को वोट देना है तो वह उन्हें वरीयता क्रम में 1 पर रखेगा। इसी तरह अगर किसी को सुदर्शन रेड्डी को वोट देना है तो उन्हें वरीयता क्रम में 1 पर रखेगा।
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जीतने के लिए उम्मीदवार को बहुमत कोटा (कुल वैध मतों के आधे से अधिक) हासिल करना होगा। यदि कोई उम्मीदवार पहली वरीयता में यह सीमा पार नहीं कर पाता है तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को हटा दिया जाता है और उसके वोट अगली वरीयता के आधार पर ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। यह तब तक चलता रहता है जब तक कि कोई एक उम्मीदवार यह सीमा पार नहीं कर लेता।
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