
बेंगलुरु: बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर विदेश भागे विजय माल्या के खिलाफ देश की कई अदालतों में मामले चल रहे हैं। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार विजय माल्या को लंदन से प्रत्यर्पित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। धोखाधड़ी के मामलों से विलेन बने विजय माल्या कुछ महीने पहले एक पॉडकास्ट के जरिए सामने आकर कई लोगों के लिए हीरो बन गए थे। अब जब लग रहा था कि सब कुछ अपनी रफ्तार से चल रहा है, तभी विजय माल्या ने लंदन में बैठे-बैठे कर्नाटक हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर दी है। माल्या की इस गुगली से क्या केंद्र सरकार मुश्किल में पड़ गई है, इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
विजय माल्या ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर कहा है कि उनके कर्ज, बैंकों द्वारा संपत्ति जब्त करने, खाते फ्रीज करने और वसूली गई रकम, इन सबका हिसाब-किताब दिया जाए। विजय माल्या ने 6,200 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन बैंकों ने ब्याज समेत 14,000 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं। इसी का सही हिसाब मांगते हुए विजय माल्या ने यह रिट याचिका दायर की है।
विजय माल्या की ओर से वरिष्ठ वकील सजन पूवैया ने दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने सवाल किया कि आपने कंपनी कोर्ट में याचिका क्यों नहीं डाली, सुप्रीम कोर्ट के अवमानना मामले में माल्या पेश नहीं हुए हैं। विजय माल्या कई मामलों में कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। ऐसे में अब रिट याचिका कैसे दायर कर सकते हैं? लेकिन सजन पूवैया ने इसका भी जोरदार बचाव किया।
कोर्ट ने पूछा कि आप रिट याचिका में बैंकों से हिसाब-किताब कैसे मांग सकते हैं। इस पर जवाब देते हुए सजन पूवैया ने कहा कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण हाईकोर्ट के अधीन आता है। बैंक कुछ और कहते हैं और ऑफिशियल लिक्विडेटर कुछ और। एक समय था जब यूबीएचएल कंपनी दुनिया में एक मशहूर कंपनी थी। डॉ. विजय माल्या यूबीएचएल के निदेशक थे। हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करना उनका संवैधानिक अधिकार है, ऐसा सजन पूवैया ने तर्क दिया।
सुप्रीम कोर्ट के अवमानना मामले में माल्या के पेश न होने पर हाईकोर्ट के सवाल का जवाब देते हुए सजन पूवैया ने कहा कि विजय माल्या लंदन कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं।
माल्या को 6200 करोड़ का कर्ज चुकाना था, जबकि 14,000 करोड़ की वसूली हो चुकी है। यह हिसाब खुद वित्त मंत्री ने लोकसभा में पेश किया है। पूरा कर्ज चुकाने के बाद भी प्रक्रिया जारी रखी जा रही है। इसलिए, कर्ज वसूली का हिसाब-किताब मांगने के लिए डॉ. विजय माल्या ने याचिका दायर की है, ऐसा वकील ने तर्क दिया।
बैंकों की ओर से वरिष्ठ वकील विक्रम हुइलगोल ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि माल्या देश छोड़कर भाग गए हैं। अगर माल्या निर्दोष होते तो उन्हें भारत लौटकर न्यायिक प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहिए था। वे सिर्फ तभी कोर्ट के सामने आते हैं जब उन्हें जरूरत होती है। पूवैया की दलीलों पर आपत्ति दर्ज करने के लिए जस्टिस ललिता कन्नेगंटी ने बैंकों के वकील को निर्देश दिया है। साथ ही, मामले की सुनवाई 12 नवंबर तक के लिए टाल दी है।
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