दिल्ली में CAA के खिलाफ फिर हिंसा, शांति बनाए रखने के लिए एडिशनल फोर्स तैनात, 4 लोगों ने गंवाई जान

Published : Feb 24, 2020, 06:59 PM ISTUpdated : Feb 24, 2020, 11:55 PM IST
दिल्ली में CAA के खिलाफ फिर हिंसा, शांति बनाए रखने के लिए एडिशनल फोर्स तैनात, 4 लोगों ने गंवाई जान

सार

गोकुलपुरी में तैनात हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की मौत हो गई। वहीं अमित शर्मा घायल हुए हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। पुलिसकर्मी की मौत के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर लोगों से हिंसा रोकने की अपील की है। पुलिसकर्मी हर जगह मार्च कर रहे हैं और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।   

नई दिल्ली. दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध में फिर से हिंसा शुरू हो गई है। जाफराबाद में भजनपुरा और मौजपुर में प्रदर्शनकारियों ने पथराव और फायरिंग करते हुए पेट्रोल पंप और वाहनों में आग लगा दी। इस घटना में गोकुलपुरी में तैनात हेड कॉन्सटेबल रतन लाल और एक आम नागरिक की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई है और हर जगह पुलिस के जवान मार्च कर रहे हैं। पुलिसकर्मी की मौत के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर लोगों से हिंसा रोकने की अपील की है। सोनिया गांधी ने भी जवान की मौत पर दुख जताते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हिंसक प्रदर्शनों में अब तक कुल 4 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 

10 पुलिसकर्मी जख्मी 1 की मौत

इन हिंसक प्रदर्शनों में कुल 10 पुलिसवाले घायल हुए हैं। हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की सिर में चोट लगने के कारण मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने शहर में कई जगहों पर आग लगा दी और सार्वजनिक संपत्ति को जमकर निकसान पहुंचाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस होटल में ठहरे हुए हैं उससे सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर यह सब कुछ हो रहा है।  

संवेदनशील जगहों पर पुलिस के जवान कर रहे मार्च

हिंसा भड़कने के बाद सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी गई है और राज्य में धारा 144 लगा दी गई है। दिल्ली के स्पेशल पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि पुलिस के जवान हर जगह एकत्रित हुए लोगों से शांतिपूर्वक घर जाने की अपील कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस भी सभी से राज्य में लॉ और ऑडर्र मेंटेन करने में मदद करने की अपील कर रही है। दिल्ली में होने परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं।   

राज्य गृहमंत्री ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

दिल्ली के गृहमंत्री किशन रेड्डी ने पुलिस को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिन इलाकों में हिंसा हुई है वहां धारा 144 लगा दी गई है। दिल्ली में एडिशनल पुलिस फोर्स भी लगाई गई है। हर जगह हिंसा को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। जिसके बाद सभी जगहों पर अब हालात काबू में हैं और शांति व्यवस्था बनी हुई है।   

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पुलिसकर्मी की मौत के बाद ट्वीट कर लोगों से हिंसा रोकने की अपील की है। उन्होंने लिखा "पुलिस हेड कोंस्टेबल की मौत बेहद दुःखदायी है। वो भी हम सब में से एक थे। कृपया हिंसा त्याग दीजिए। इस से किसी का फ़ायदा नहीं। शांति से ही सभी समस्याओं का हल निकलेगा " 
 

राहुल गांधी ने लिखा "दिल्ली में हो रही हिंसा परेशान करने वाली है और इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए। शांतिपऊर्ण प्रदर्शन अच्छे लोकतंत्र की निशानी होते हैं, पर हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। मैं दिल्ली के लोगों से समझदारी और संयम दिखाने की अपील करता हूं।"

जाफराबाद में रविवार को भी हिंसा हुई थी। सोमवार को यहां नागरिकता कानून के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी उतरे थे। यहां नागरिकता कानून के समर्थन में भी कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे थे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। पुलिस बल कम होने के चलते यहां हालत बेकाबू हो गए।

सीएए के विरोध में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास भी प्रदर्शन चल रहा है। वहीं, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने समर्थकों के साथ मौजपुर में सीएए के समर्थन में प्रदर्शन किया था।

मौजपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी हुई। इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद हालात काबू में कर लिए गए थे। यहां सीएए के विरोध और समर्थन में नारेबाजी भी हुई थी।

15 दिसंबर से ही विरोध प्रदर्शन हो रहा है
शाहीन बाग में 15 दिसंबर से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं। दिल्ली चुनाव में शाहीन बाग का मुद्दा जोरों पर था।

क्या है नागरिकता संशोधन कानून?नागरिकता संशोधन विधेयक को 10 दिसंबर को लोकसभा ने पारित किया। इसके बाद राज्य सभा में 11 दिसंबर को पारित हुआ। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह विधेयक कानून बन गया।

 इस कानून के मुताबिक, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता के लिए संबंधित शख्स 6 साल पहले भारत आया हो। इन देशों के छह धर्म के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुला। ये 6 धर्म हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी हैं।
 

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