
कोलकाता। अग्नि के सात फेरे लेते समय हर दम- हर परिस्थिति में साथ निभाने का वचन लिया जाता है। इस वचन को एक बुजुर्ग ने अपनी पत्नी के मरने के बाद तक निभाने की कोशिश की। पत्नी की मौत के बाद भी वह उसके साथ कमरे में ही साथ साथ रहा। हालांकि, कई दिनों के बाद जब दुर्गन्ध घर के बाहर भी आने लगी तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की मदद से किसी तरह बुजुर्ग को मनाया गया और शव का अंतिम संस्कार हो सका। बुजुर्ग को पुलिस ने मानसिक अस्पताल में भेज दिया है।
दुर्गा पूजा की जश्न के बीच झकझोर देने वाली घटना
सेवानिवृत्त दुलाल दास बर्मन और उनकी पत्नी दीप्ति पिछले बीस वर्षों से सरदार पाड़ा में रहते थे। दीप्ति दास बर्मन वर्षों से बीमार चल रही थी। नवरात्रि के दौरान ही उनका निधन हो गया। लेकिन यह बात किसी को पता नहीं चला।
महानवमी की सुबह मोहल्ले में दुर्गंध फैली तो...
गुरुवार, महानवमी की सुबह मकान से बहुत तेज दुर्गंध आने लगी। लोगों ने इसकी सूचना मकान मालिक को दी। फिर मकान मालिक ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस पहुंची तो देखी कि बर्मन अपनी मृत पत्नी के साथ हैं। शव सड़ने से दुर्गंध आ रहा था लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे कि उनकी पत्नी का निधन हो चुका है।
वृद्ध दुलाल बर्मन से पुलिस ने पूछा तो उन्होंने कहा कि उसकी पत्नी जिंदा है। बताया जा रहा है कि वृद्ध अपनी मरी पत्नी को पांच दिनों से खाना-पानी दे रहे थे। वह यह मानने को किसी भी सूरत में तैयार नहीं थे कि उनकी मौत हो गई है।
दो बेटे हैं, दोनों रहते हैं बाहर
बुजुर्ग दंपति के दो बेटे हैं। सबसे बड़ा बेटा बिप्लब दास बर्मन रोजगार के सिलसिले में दिल्ली में रहता है। सबसे छोटा बेटा बिशु दास बर्मन गोवा में रहता है।
एक दूसरे से बेहद प्रेम करते थे बुजुर्ग
मकान मालिक और स्थानीय लोग यह बताते हैं कि करीब बीस साल से यह दंपत्ति किराये पर रहता है। दोनों एक दूसरे से बेहद प्रेम करते थे। कभी भी दोनों को लोगों ने अलग नहीं देखा था। पत्नी कुछ दिनों से बीमार थीं। बुजुर्ग उनकी सेवा में लगे रहते थे।
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