
Jan Vishwas Bill. लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी गई। यह व्यापार करने में आसानी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यह ईज टू डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने वाला है और छोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रयास करता है। पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इसे संसद में पेश किया था। बाद में इसे संसद की संयुक्त समिति को विचार करने के लिए भेजा गया। बजट सत्र के दौरान जेपीसी ने सात बुनियादी सुझावों के साथ संसद में अपने निष्कर्ष पेश किए। इनमें से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने छह सुझावों को मंजूरी दे दी।
क्या है जन विश्वास बिल
इसके तहत पर्यावरण, कृषि उद्योग, प्रसारण क्षेत्र और प्रकाशन सहित 42 क्षेत्रों में 42 कानूनों को संशोधित करके जन विश्वास विधेयक लाया गया है। इसमें करीब 180 तरह के उल्लंघनों को अपराध मुक्त करने का प्रयास किया गया है। इनमें 1944 का ऋण अधिनियम, 1948 का फार्मेसी अधिनियम, 1952 का सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1957 का कॉपीराइट अधिनियम, 1970 का पेटेंट अधिनियम, 1986 का पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और 1988 का मोटर वाहन अधिनियम में कानूनों को बदला गया है। इसके अलावा 1999 का ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1989 का रेलवे अधिनियम, 2000 का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2002 का धनशोधन निवारण अधिनियम, 2006 का खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2009 का कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम और 2011 का फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम भी शामिल है। कुल मिलाकर व्यापार करने की सहूलियत देना प्रमुख उद्देश्य है। इन 42 कानूनों का प्रशासन कई केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा संभाला जाता है, जिनमें धन, खाद्य उत्पादन और वितरण, वित्तीय सेवाएं, कृषि, व्यापार, पर्यावरण, सड़क और राजमार्ग, डाक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी के प्रभार शामिल हैं। इनमें हुए बदलाव से आम नागरिकों को सहूलियत होगी।
जन विश्वास बिल से नागरिकों को क्या लाभ होगा?
विधेयक आपराधिक कानूनों को तर्कसंगत बनाने में सहायता करेगा ताकि लोग, व्यवसाय और सरकारी एजेंसियां छोटे या तकनीकी रूप से गलत उल्लंघनों के लिए जेल जाने की चिंता के बिना काम कर सकें। प्रस्तावित कानून किए गए कार्य या उल्लंघन की गंभीरता और उसके दंड की गंभीरता के बीच बैलेंस बनाता है। यह भी है क न्याय प्रदान की प्रणाली तकनीकी और प्रक्रिया की त्रुटियों, छोटी गलतियों और महत्वपूर्ण अपराधों के निर्धारण में देरी के कारण बोझिल हो गई हैं। इससे अपराधों का बोझ कम होगा और मामलों के लंबित होने का समय भी कम होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कानूनों को सरल बनाने, बाधाओं को दूर करने के साथ ही सरकार और उद्यमों के लिए समय और धन की बचत करता है।
केंद्र सरकार ने कितने कानून खत्म किए
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनुसार एनडीए प्रशासन पहले ही 1,486 कानूनों को खत्म कर चुका है और इस उपाय को संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह संख्या बढ़कर 1,562 हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले प्रशासन ने पिछले 9 वर्षों में नागरिकों के लिए समस्या बनने वाले करीब 40,000 कानूनों और विनियमों को समाप्त करके इसे आसान बना दिया है।
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