
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले कोयला खनन घोटाला चर्चा में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी तक जांच की आंच पहुंच गई है। अभिषेक बनर्जी की पत्नी को सीबीआई ने दो बार नोटिस जारी किया। सीबीआई की टीम अभिषेक की साली मेनका से भी पूछताछ कर सकती है। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर चुनाव से पहले सुर्खियों में आया कोयला घोटाला क्या है और पश्चिम बंगाल की परिवार इसकी जद में कैसे पहुंचा?
पिछले साल से शुरू हुई कहानी
दरअसल, पिछले साल नवंबर में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बड़े तस्करी का भंडाफोड़ हुआ। इसमें तस्करी के कथित सरगना इनामुल हक की गिरफ्तारी हुई। तस्करी के तार यूथ तृणमूल कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी नेता विनय मिश्रा तक पहुंचे।
फिर आई 31 दिसंबर 2020 की तारीख
31 दिसंबर 2020 को कोलकाता में विनय मिश्रा के खिलाफ पशु तस्करी और अवैध कोयला खनन के मामले में तलाशी अभियान चलाया गया। विनय के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी हुआ। विनय मिश्रा फरार हो गया।
विनय, अभिषेक बनर्जी का करीबी
विनय मिश्रा को अभिषेख बनर्जी के करीबी के तौर पर जाना जाता है। सीबीआई को शक है कि कोयला घोटाले से जुड़े कुछ संदिग्ध लेन देन अभिषेख बनर्जी की पत्नी रुजिरा और उनकी बहन के खाते से हो सकते हैं।
ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगा?
पिछले साल सितंबर में कोयला घोटाले की जांच शुरू हुई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कोयला घोटाले से मिले पैसों को टीएमसी के नेताओं ने शेल कंपनियों के जरिए व्हाइट मनी में बदला। इससे सबसे ज्यादा फायदा सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को हुआ। अभिषेक बनर्जी टीएमसी की युवा विंग के अध्यक्ष हैं। विनय मिश्रा उसी युवा विंग के नेता हैं। विनय मिश्रा शुरू से ही कोयला घोटाले के आरोपी हैं।
पश्चिम बंगाल में 13 जगहों पर तलाशी
कोयला चोरी मामले में सीबीआई पश्चिम बंगाल में 13 जगहों पर तलाशी ले रही है। पुरुलिया, बांकुरा, बर्दवान और कोलकाता में छापेमारी का काम हो रहा है। ये छापेमारी युवा तृणमूल कांग्रेस के नेता विनय मिश्रा, व्यवसायी अमित सिंह और नीरज सिंह के ठिकानों पर हुई थी।
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