हैदराबाद में ACB की बड़ी रेड ने सनसनी फैला दी है। वॉटर बोर्ड मैनेजर अनंता लक्ष्मी कुमार के ठिकानों पर छापों में 100 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति, 1.10 करोड़ नकद, 1 किलो सोना, फ्लैट और प्लॉट सामने आए हैं। रिश्तेदारों के घर और बैंक लॉकरों की जांच जारी है, जिससे भ्रष्टाचार और मनी ट्रेल का बड़ा नेटवर्क उजागर होने की आशंका गहराती जा रही है।
Hyderabad ACB Raid: देश के अलग-अलग हिस्सों में भ्रष्टाचार और वित्तीय हेरफेर के खिलाफ केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों ने एक साथ चौतरफा चक्रव्यूह रच दिया है। हैदराबाद से लेकर पंजाब और दिल्ली के कॉर्पोरेट गलियारों तक, जांच अधिकारियों के हाथ जो लगा है, उसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। कहीं आलीशान फ्लैट्स का साम्राज्य मिला है, तो कहीं गिरफ्तारी के डर से नोटों से भरे बैग खिड़कियों से नीचे फेंके जा रहे हैं। इनमें सबसे दिलचस्प कहानी हैदराबाद के सरकारी महकमे में फैले भ्रष्टाचार के उस काले नेटवर्क की है, जिसने एक मामूली पद पर बैठे अधिकारी को रातों-रात अकूत संपत्ति का मालिक बना दिया। मंगलवार सुबह जब हैदराबाद की सोती हुई सड़कों पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की गाड़ियां एक साथ कई ठिकानों की तरफ बढ़ीं, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि शाम होते-होते देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में से एक का भंडाफोड़ होने वाला है। अचूक खुफिया जानकारी के आधार पर ACB की स्पेशल टीमों ने हैदराबाद वॉटर बोर्ड के मैनेजर अनंता लक्ष्मी कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करते हुए उनके ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। शुरुआती जांच और चल रही तलाशी में अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का पता चल चुका है, जिसे देखकर खुद जांच अधिकारी भी दंग हैं।


हैदराबाद: मल्लापुर आवास में नोटों की गड्डियां और किलो के भाव सोना-जब खुलीं अलमारियां
तड़के सुबह जब ACB की टीमों ने मैनेजर अनंता लक्ष्मी कुमार के मल्लापुर स्थित मुख्य आवास का दरवाजा खटखटाया, तो आरोपी अधिकारी के चेहरे का रंग उड़ गया। घर के चप्पे-चप्पे की तलाशी के दौरान जैसे ही अलमारियां और गुप्त लॉकर खोले गए, अधिकारियों के सामने नोटों की गड्डियां बिखर गईं। शुरुआती गिनती में ही कुमार के घर से लगभग 1.10 करोड़ रुपये की बेनामी नकदी (Cash) बरामद की गई। बात यहीं खत्म नहीं हुई; तिजोरियों से सोने की चमचमाती कड़ियां, हार और बेशकीमती गहने निकलने शुरू हुए, जिनका वजन करने पर पता चला कि आरोपी ने घर में लगभग एक किलोग्राम शुद्ध सोने के आभूषण छिपा रखे थे। इस बेहिसाब दौलत को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया गया है।
गेटेड सोसाइटी में फ्लैट्स और एकड़ में फैली जमीन: रसूखदारों के यहां भी दस्तक
जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, छापेमारी का दायरा और बड़ा होता गया। अनंता लक्ष्मी कुमार के घर से मिले गुप्त दस्तावेजों के आधार पर ACB ने आरोपी के रिश्तेदारों और करीबी करीबियों के ठिकानों पर भी शिकंजा कस दिया। अब तक की जांच में जो जमीनी साम्राज्य सामने आया है, उसने सबको चौंका दिया है। ब्यूरो ने हैदराबाद की बेहद पॉश और महंगी गेटेड सोसायटियों में तीन आलीशान फ्लैट्स, शहर के प्राइम लोकेशंस पर छह बड़े खुले प्लॉट और निजामाबाद इलाके में लगभग तीन एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ शुरुआत है; असली राज तो तब खुलेंगे जब जांच एजेंसियां कुमार के नाम पर दर्ज कई बैंक लॉकरों को सील कर उन्हें खोलने की तैयारी पूरी करेंगी।

पंजाब में हाई-वोल्टेज ड्रामा: बालकनी से गिरा 21 लाख का बैग!
भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी सबसे सनसनीखेज तस्वीर पंजाब से आई, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान फिल्मी स्टाइल का हाई-ड्रामा देखने को मिला। जमीन के इस्तेमाल में चल रही बड़ी धोखाधड़ी और राजनीतिक सांठगांठ की जांच करने पहुंची ED की टीम को देखकर आरोपियों में ऐसी अफरा-तफरी मची कि जांच के दौरान ही एक बालकनी से 21 लाख रुपये कैश से भरा बैग नीचे फेंक दिया गया। इस अजीबोगरीब वाकये ने स्थानीय बिचौलियों और रसूखदार राजनीतिक हस्तियों के बीच के गहरे और काले गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

कॉर्पोरेट गलियारों में हड़कंप: रिलायंस ADA ग्रुप पर CBI और ED का शिकंजा
इस बीच, देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियों-CBI और ED-ने देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने रिलायंस ADA ग्रुप (अनिल अंबानी समूह) के खिलाफ अपना शिकंजा और कस दिया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है।
ED और CBI की संयुक्त कड़ाई के बाद कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं और कुछ बेहद रसूखदार शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। सरकारी धन के दुरुपयोग और इस जटिल वित्तीय कदाचार के जाल को तोड़ने के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट जांच मानी जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों से नकाब उतरना तय है।


